हिमाचल विधानसभा में संस्थानों पर फिर संग्राम: 2035 डिनोटिफाई, 362 नए खुले; जयराम बोले- ‘बंद क्यों किए, सरकार बताए’

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सुक्खू का पलटवार- पिछली सरकार ने राजनीतिक आधार पर खोले 700 शैक्षणिक संस्थान, कई जगह शिक्षक-स्टाफ और आधारभूत ढांचा तक नहीं था

एएम नाथ। शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के 8वें दिन सरकारी संस्थानों को बंद करने, डिनोटिफाई करने और दोबारा खोलने का मुद्दा एक बार फिर सदन में गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर समेत भाजपा विधायकों ने सरकार पर राजनीतिक द्वेष के चलते संस्थान बंद करने का आरोप लगाया, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पिछली भाजपा सरकार के फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि संस्थान राजनीतिक आधार पर नहीं, बल्कि जनता की जरूरत और निर्धारित मानकों के आधार पर खोले या बंद किए जा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल और रणधीर शर्मा ने संस्थानों से जुड़े सवाल सदन में उठाए।

‘साढ़े तीन साल बाद मिला जवाब, वह भी अधूरा’

जयराम ठाकुर ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब साढ़े तीन साल बाद उनके प्रश्न का जवाब मिला है, लेकिन वह भी पूरा नहीं है।

सरकार की ओर से बताया गया कि वर्तमान कार्यकाल में अब तक 2,035 संस्थानों को डिनोटिफाई किया गया है, जबकि 362 नए संस्थान खोले गए हैं। इसके अलावा डिनोटिफाई किए गए 123 संस्थानों को दोबारा खोला गया।

जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब इन संस्थानों को पहले बंद किया गया था तो आखिर उन्हें दोबारा खोलने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पूर्व सरकार के समय खोले गए संस्थान गलत थे या नहीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकाल के अंतिम वर्षों में भी सरकार चुन-चुनकर संस्थान बंद कर रही है।

सुक्खू का पलटवार- ‘आपने राजनीतिक आधार पर संस्थान खोले’

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि इस सवाल का जवाब पहले ही मिल जाना था, लेकिन अब इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संस्थान भाजपा या कांग्रेस देखकर नहीं, बल्कि जनता की जरूरत के हिसाब से खोले या बंद किए जाते हैं। मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार पर राजनीतिक आधार पर संस्थान खोलने का आरोप लगाया।

‘700 शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक तक नहीं थे’

मुख्यमंत्री सुक्खू ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने करीब 5,000 करोड़ रुपये की रेवड़ियां बांटीं और अपने कार्यकाल में लगभग 700 ऐसे शैक्षणिक संस्थान खोले, जहां शिक्षक, पूरा स्टाफ और पर्याप्त आधारभूत ढांचा तक उपलब्ध नहीं था।

उन्होंने कहा कि कई जगह केवल एक शिक्षक की नियुक्ति कर स्कूल को अपग्रेड कर दिया गया। ऐसे संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया गया और अब संस्थान खोलने के लिए स्पष्ट पैरामीटर निर्धारित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा खोले जा रहे संस्थान नीड बेस्ड हैं और स्वास्थ्य संस्थानों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। भविष्य में भी संस्थान वास्तविक जरूरत के आधार पर खोले जाएंगे।

रणधीर शर्मा बोले- ‘सरकार राजनीतिक लाभ के लिए ले रही फैसले’

भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपलब्ध आंकड़े 31 जुलाई 2025 तक के हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार 31 जुलाई 2026 तक का पूरा आंकड़ा सदन में रखे।

उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व सरकार के समय जल शक्ति विभाग का एक डिवीजन खोला गया था। वहां स्टाफ और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध थीं, लेकिन कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद इसे बंद कर दिया गया।

रणधीर शर्मा ने कहा कि करीब तीन साल बाद मुख्यमंत्री के दौरे के बाद कुछ किलोमीटर की दूरी पर फिर से डिवीजन खोल दिया गया, लेकिन इस बार स्टाफ पहले से भी कम है और भवन अभी भी किराये का है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पहले डिवीजन की जरूरत नहीं थी तो तीन साल बाद उसी क्षेत्र में दोबारा जरूरत कैसे पैदा हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर संस्थानों से जुड़े फैसले कर रही है।

बिक्रम ठाकुर बोले- ‘तीन साल में सरकार को नीड ही नहीं पता चली’

भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन साल के कार्यकाल में सरकार को अब तक यह पता नहीं चल पाया कि कहां किस संस्थान की जरूरत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थानों को बंद करने और खोलने के फैसलों के पीछे राजनीतिक मकसद दिखाई देता है।

जयराम का आरोप- ‘बदले की भावना से बंद किए संस्थान’

जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने राजनीतिक मकसद से संस्थानों को बंद किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बदले की भावना से जनता के हित में खोले गए संस्थानों पर ताले लगाए गए।

उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या वह बंद किए गए सभी संस्थानों के फैसलों की समीक्षा करेगी। जयराम ने कहा कि भाजपा सरकार ने जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग के आधार पर संस्थान खोले थे।

सुक्खू बोले- ‘कुछ संस्थान सेंसेस के बाद खोले जाएंगे’

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि संस्थान किसी व्यक्ति की इच्छा के आधार पर न तो खोले जाते हैं और न ही बंद किए जाते हैं। सरकार जरूरत, उपलब्ध संसाधनों और तय मानकों के आधार पर निर्णय ले रही है।

उन्होंने कहा कि कुछ संस्थान सेंसेस पूरा होने के बाद दोबारा खोले जाएंगे।

विधानसभा में हुई इस बहस से साफ है कि संस्थानों को डिनोटिफाई करने और नए संस्थान खोलने का मुद्दा हिमाचल की राजनीति में अभी भी बड़ा विवाद बना हुआ है। आने वाले दिनों में भी विपक्ष इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ प्रमुख राजनीतिक हथियार के रूप में उठा सकता है।

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