अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में साइट इंजीनियर था 30 वर्षीय सुखविंदर रतन, 25 अगस्त को हुई थी परिवार से आखिरी बातचीत
रोहित जसवाल। ऊना। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद हिमाचल प्रदेश के ऊना निवासी 30 वर्षीय इंजीनियर सुखविंदर रतन लापता हैं। सुखविंदर नेपाल के अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में साइट इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे। हादसे के कई दिन बीत जाने के बावजूद उनका कोई पुख्ता सुराग नहीं मिलने से परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
परिवार ने केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए विशेष रेस्क्यू टीम भेजने और तलाश अभियान को तेज करने की अपील की है। परिजनों का कहना है कि यदि जरूरत पड़े तो भारत सरकार को नेपाल में राहत एवं बचाव कार्य में जुटी अन्य देशों की टीमों के साथ समन्वय कर सुखविंदर की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए।
चार महीने पहले शुरू किया था काम, दीवाली पर घर लौटने का किया था वादा
परिवार के मुताबिक सुखविंदर ने करीब चार महीने पहले ही अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम शुरू किया था। पिछले महीने वह छुट्टी लेकर घर आए थे और 15 अगस्त को वापस नेपाल लौट गए थे। घर से रवाना होते समय उन्होंने परिवार से दीवाली पर वापस आने का वादा किया था।
लेकिन अब हादसे के बाद परिवार उनकी सुरक्षित वापसी की आस लगाए बैठा है।
पत्नी सरवजीत कौर का रो-रोकर बुरा हाल
सुखविंदर की पत्नी सरवजीत कौर का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर बचाव अभियान को तेज कराने की मांग की है।
सरवजीत कौर के मुताबिक उन्हें जानकारी मिली है कि बाढ़ से प्रभावित सुरंगों की एक-एक करके तलाशी ली जा रही है। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू अभियान में अधिक कर्मचारियों और विशेषज्ञों को लगाया जाना चाहिए, ताकि सुरंगों और प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों की तलाश जल्द पूरी हो सके।
परिवार का कहना है कि भारत सरकार को नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।
25 अगस्त को हुई थी आखिरी बातचीत
परिवार के अनुसार सुखविंदर से आखिरी बार 25 अगस्त को बातचीत हुई थी। इसके बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। हादसे की जानकारी मिलने के बाद परिवार लगातार नेपाल में मौजूद अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर रहा है।
डेढ़ साल का बेटा, परिवार की उम्मीदें सुखविंदर की सुरक्षित वापसी पर टिकीं
सुखविंदर और सरवजीत कौर का करीब डेढ़ साल का बेटा है। मासूम बेटे के भविष्य को लेकर भी परिवार बेहद चिंतित है। परिजन लगातार उम्मीद कर रहे हैं कि सुखविंदर सुरक्षित मिलेंगे और जल्द घर लौटेंगे।
सुखविंदर के चचेरे भाई शुभम और एक अन्य रिश्तेदार 28 अगस्त को काठमांडू पहुंचे थे। उन्होंने वहां स्थानीय लोगों, बचे हुए कर्मचारियों और नेपाल के अधिकारियों से सुखविंदर के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
परिवार का दावा—अपर त्रिशूली साइट पर रेस्क्यू की रफ्तार धीमी
शुभम का दावा है कि जिस अपर त्रिशूली टनल साइट पर सुखविंदर और अन्य कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है, वहां रेस्क्यू ऑपरेशन अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है। उनका कहना है कि बचाव दल अभी तक अपर त्रिशूली प्रोजेक्ट साइट तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाया है।
उन्होंने बताया कि भारतीय और चीनी रेस्क्यू टीमें फिलहाल त्रिशूली-3A और अन्य डाउनस्ट्रीम परियोजनाओं में बचाव कार्य में जुटी हैं। परिवार की मांग है कि अपर त्रिशूली साइट के लिए भी तत्काल विशेष टीम भेजी जाए और सुरंगों की गहन तलाशी कराई जाए।
शुभम 31 अगस्त को दिल्ली लौटे हैं, ताकि विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों से मुलाकात कर सुखविंदर की तलाश तेज कराने की मांग कर सकें। परिवार ने काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास को भी मामले की जानकारी दी है।
नेपाल अधिकारियों का दावा—करीब 300 लोगों को सुरंग से सुरक्षित निकाला
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से करीब 300 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इनमें अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट से जुड़े 250 से अधिक लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। हालांकि, सुखविंदर के परिवार को अभी तक उनकी स्थिति को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है।
सीएम सुक्खू ने परिवार को दिया मदद का भरोसा
मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी सुखविंदर के चचेरे भाई शुभम से फोन पर बातचीत की है। मुख्यमंत्री ने परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।
अब परिवार की एक ही मांग है—नेपाल की अपर त्रिशूली परियोजना में विशेष रेस्क्यू टीम पहुंचाई जाए और सुरंगों में फंसे सुखविंदर रतन की तलाश युद्धस्तर पर की जाए।
