हिमाचल में महंगी सीमेंट पर पीएम मोदी ने कसा तंज … कहा GST घटा तो हिमाचल सरकार लग गई लूटने

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एएम नाथ । शिमला : जीएसटी 2.0 ने त्योहारी सीजन में आम जन को काफी राहत दी है। इनमें से एक सीमेंट के दाम कम होना भी है, जिसपर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि इसका लाभ हिमाचल की जनता को नहीं मिला क्योंकि वहां की सरकार ने जीसएटी से होने वाले नुकसान का हवाला देते हुए सीमेंट के दाम बढ़ा दिए।

इसपर आज पीएम मोदी ने हमला बोला है। दिल्ली के बीजेपी ऑफिस के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे मोदी ने सुक्खू सरकार पर हमला करते हुए कहा कि जीएसटी से दाम कम होने के तुरंत बाद हिमाचल प्रदेश की सरकार ने सीमेंट के दाम बढ़ा दिए। उन्होंने तुरंत ही अपनी तिजोरियां भरनी शुरू कर दीं।

दिल्ली में बीजेपी के प्रदेश कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर पहुंचे पीएम मोदी के निशाने पर इस बार हिमाचल की सुक्खू सरकार रही। मोदी ने कहा कि नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म्स के बाद हमारी जिम्मेदारी बन जाती है कि हम ग्राहक को जानकारी दें और दुकानदार को भी जागरुक करें। जहां हम विपक्ष में हैं वहां ये और भी जरूरी हो जाता है। विपक्ष वाले उल्टा ही करते हैं। मोदी ने कहा कि ये हमने जैसे ही जीएसटी से दाम कम कर दिया, हिमाचल वालों ने सीमेंट पर पैसा बढ़ा दिया। तिजोरी भरने का खेल शुरू कर दिया।

मोदी ने आगे कहा कि जो जनता के हक का है,जिसका लाभ जनका को मिलना चाहिए था, उसे लूटने में हिमाचल सरकार उसी दिन(जीएसटी कम होने) से लग गई। उन्होंने आगे कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाना है और स्वदेशी को अपनाना है। ये भाजपा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि हर दुकान पर बड़ा बोर्ड हो और लिखा हो गर्व से कहो हम स्वदेशी हैं।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने सीमेंट की कीमतों में ₹5 प्रति बैग की बढ़ोतरी करने के अपने फैसले को सही ठहराया है। सरकार का तर्क है कि यह कदम वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की ओर से सीमेंट पर टैक्स कम करने के बाद हुए भारी वित्तीय नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए जरूरी है।

तकनीकी शिक्षा और नगर एवं ग्राम नियोजन (Town and Country Planning- TCP) मंत्री राजेश धर्मानी ने शनिवार को कहा कि GST दर में 28% से 18% तक की कटौती के कारण राज्य को प्रत्यक्ष राजस्व में लगभग ₹1,000 करोड़ का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस नुकसान ने पहले से ही आपदा से जूझ रही अर्थव्यवस्था को और बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, “यह फैसला उन बड़े राज्यों को फायदा पहुंचाता है, जहां खपत अधिक है, लेकिन हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे छोटे पहाड़ी राज्य सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।”

 

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