कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार के लिए 369.82 एकड़ भूमि का इंतजार, राज्य सरकार को केंद्र की याद
UDAN योजना से हिमाचल को रफ्तार, 40 हवाई मार्ग संचालित, हेलिपोर्ट विकास पर भी फोकस
एएम नाथ। शिमला
हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क और नागरिक उड्डयन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। यह जानकारी केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में भाजपा सांसद हर्ष महाजन के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। सांसद ने प्रदेश में एयरपोर्ट विस्तार, भूमि अधिग्रहण, हवाई संपर्क और हेलिपोर्ट विकास से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्तमान में शिमला हवाई अड्डा दिल्ली और धर्मशाला, कांगड़ा (गगल) हवाई अड्डा दिल्ली, जेवर, चंडीगढ़ और शिमला तथा कुल्लू-भुंतर हवाई अड्डा अमृतसर, दिल्ली और जयपुर से हवाई सेवाओं के माध्यम से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हवाई संपर्क को और बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार कार्य कर रही है।
मंत्री ने बताया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने राज्य सरकार के अनुरोध पर कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार की योजना तैयार कर ली है। इसके लिए 369.82 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है, जो अभी तक राज्य सरकार की ओर से एएआई को उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति-2016 के अनुसार एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराना संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी बताया कि कुल्लू-भुंतर हवाई अड्डे के विस्तार और शिमला एयरपोर्ट के रनवे विस्तार में कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और भूमि संबंधी सीमाएं प्रमुख बाधा हैं। मौजूदा परिस्थितियों में इन परियोजनाओं का विस्तार व्यावहारिक नहीं माना गया है।
केंद्र सरकार के अनुसार क्षेत्रीय संपर्क योजना (UDAN) के तहत हिमाचल प्रदेश में अब तक 40 हवाई मार्ग शुरू किए जा चुके हैं। वहीं रामपुर, मंडी, रिकांगपिओ और संजौली से हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित हो रही हैं। राज्य में हेलिपोर्ट अवसंरचना के विकास के लिए 51.11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 37.31 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक संशोधित UDAN योजना के तहत पर्वतीय, उत्तर-पूर्वी और आकांक्षी क्षेत्रों में 200 हेलिपोर्ट विकसित करने के लिए 3,661 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हिमाचल सरकार उपयुक्त स्थलों की पहचान कर प्रस्ताव भेज सकती है, जिन पर परिचालन व्यवहार्यता के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
