मनप्रीत सिंह अयाली ने अकाली दल (पुनर सुरजीत) के सभी पदों से दिया इस्तीफा
पंजाब की राजनीति में हलचल, अयाली बोले- दिल्ली से चलने वाली पार्टियों में नहीं जाएंगे
एएम नाथ। चंडीगढ़ : पंजाब की राजनीति में इस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुल्लांपुर दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने यह जानकारी खुद सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट साझा कर दी। अयाली के इस फैसले के बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
अपने वीडियो संदेश में मनप्रीत सिंह अयाली ने साफ कहा कि वह किसी भी तरह के दबाव में आने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी राजनीतिक परिस्थितियां बनें, वह दिल्ली से संचालित होने वाली पार्टियों में शामिल होने के बारे में सोच भी नहीं सकते। अयाली ने स्पष्ट रूप से कहा कि बीजेपी, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बादल दल जैसी पार्टियों में जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
पंजाब की राजनीति में मनप्रीत सिंह अयाली लंबे समय से एक प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं। वह पुनर्जीवित शिरोमणि अकाली दल की राजनीति से लगातार जुड़े रहे और पार्टी के भीतर मजबूत सिख चेहरों में उनकी गिनती होती रही है। खासतौर पर ग्रामीण पंजाब और मालवा क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय से अयाली पार्टी की नीतियों और संगठन के अंदरूनी फैसलों को लेकर असंतुष्ट चल रहे थे। बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व के कुछ निर्णयों से वह सहमत नहीं थे। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी नेता का नाम लेकर हमला नहीं किया, लेकिन उनके इस्तीफे को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनप्रीत सिंह अयाली का यह कदम आने वाले समय में पंजाब की सियासत पर असर डाल सकता है। शिरोमणि अकाली दल पहले ही लगातार कमजोर होती राजनीतिक स्थिति से जूझ रहा है और अब अयाली जैसे प्रभावशाली नेता का इस्तीफा पार्टी के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है।
फिलहाल अयाली के अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया है कि वह दिल्ली आधारित किसी भी पार्टी में शामिल नहीं होंगे। इसके बावजूद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में वह कोई नई रणनीति या राजनीतिक मंच तैयार कर सकते हैं।
