अधिकारियों की मनमर्जी के आगे बेबस हैं मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर

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सरकार को लेकर माननीय न्यायालय पर टिप्पणी से साफ है सरकार की नाकामी और अफसरों की मनमानी

गलत कामों के लिए संरक्षण देने पर मुख्यमंत्री को हमने पहले ही चेताया था

एडहॉक पर व्यवस्था, बेबस हैं मंत्री और विधायक

आए दिन अखबारों में रहती हैं कर्ज लेने की खबरें

एएम नाथ। शिमला :  शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि अधिकारियों की मनमर्जी के आगे मुख्यमंत्री पूरी तरीके से बेबस हैं। अधिकारी हर तरफ अपनी मर्जी चला रहे हैं और मुख्यमंत्री कुछ कर नहीं पा रहे हैं। आए दिन इस तरीके की चीजें हो रही है जिससे सरकार की नाकामी और अधिकारियों की मनमानी सामने आ रही है। हाल के दिनों में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सरकार की कार्यप्रणाली लेकर की गई टिप्पणियां यह बताने के लिए पर्याप्त है कि यह सरकार किस तरीके से चल रही है। प्रकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ही पहले माननीय न्यायालय ने सरकार को दूरदर्शी सोच के बिना काम करने वाली सरकार कहा था। इसके बाद भी अधिकारियों के रवैए में कोई परिवर्तन नहीं आया और अधिकारी अपनी मनमानी से सरकार चलाते रहे। जिसके चलते 2 दिन पहले माननीय न्यायालय को यह कहना पड़ा कि सरकार के कृत्यों से यह पता ही नहीं चल रहा है कि वह प्रदेश को चला रही है या किसी पंचायत को।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार एक तरफ स्थाई नौकरी नहीं दे रही है दूसरी तरफ अस्थाई नौकरी की भर्ती के लिए बनाए जा रहे आउट सोर्स की भर्ती के लिए एजेंसियों के चयन में भारी लापरवाही बरत रही है। यह लापरवाही अधिकारियों द्वारा अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए की जा रही है। आउटसोर्स पर भर्ती किए जाने वाले बिजली मित्र, पशु मित्र, रोगी मित्र जैसे संभावित पदों की भर्तियों में भी घोटाला किया जा सके। कभी यह सरकार फ़िनाइल बेचने वाली कंपनियों को नर्सों की भर्ती का जिम्मा दे देती है तो कभी उससे भी बड़ा कारनामा कर देती है। आए दिन कोई न कोई नेता या मंत्री अधिकारियों को धमकाता हुआ और काम करने की नसीहत देता हुआ मिल जाता है। यह नसीहत खुले मंचों से होती है। जिससे यह साफ है कि अधिकारी उनकी सुनने को राजी नहीं हैं। कभी उपमुख्यमंत्री मंचों से अधिकारियों को काम करने की नसीहत देते हैं तो कभी मीटिंग्स में मुख्यमंत्री को खुलेआम यह करना पड़ता है कि अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं?
जयराम ठाकुर ने कहा कि ऐसी स्थिति आखिर आई क्यों? अधिकारी आज इसलिए मनमर्जी कर रहे हैं क्योंकि सरकार ने उन्हें कभी ‘ऐसा- वैसा’ करने की खुली छूट दे रखी थी। जिसके कारण अब कुछ चुनिंदा अधिकारियों ने सरकार की नस-नस पहचान ली है और अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। हालत आज यह हो गई है कि अधिकारी किसी की नहीं सुन रहे हैं। विपक्ष के विधायकों की तो दूर की बात है सत्ता पक्ष के विधायकों के भी नहीं सुनी जा रही है। आखिर जिन विधायकों के दम पर सरकार का गठन हुआ है, जिन विधायकों ने मुख्यमंत्री बनाया है, वही आज बेबस क्यों है? उन्होंने कहा कि हमने मुख्यमंत्री को पहले ही आगाह किया था कि जिन अधिकारियों को आप संरक्षण दे रहे हैं वह आपको कहीं का नहीं छोड़ेंगे। आज वही स्थिति आ गई है। मुख्यमंत्री न तो स्थाई मुख्य सचिव लगा पा रहे हैं और न ही स्थाई डीजीपी। बाकी जगहों पर भी इसी तरीके से काम चल रहा है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर व्यवस्था पतन की सरकार चल रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री हर दिन बड़े-बड़े मंचों से हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की बात करते हैं लेकिन प्रदेश को आत्म निर्भर बनाने के नाम पर नियमित रूप से कर्ज लेने और कर लगाने का काम ही कर रहे हैं। प्रदेश में उद्योगों के विकास और राजस्व अर्जन की कोई भी योजना सरकार द्वारा नहीं चलाई जा रही है। क्या इसी तरीके से हिमाचल अगले दो सालों में आत्मनिर्भर राज्य बनपाएगा। सुक्खू सरकार के गवर्नेंस किया मॉडल दुर्भाग्यपूर्ण पूर्ण है।

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