सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों को मिलेगा सीधा बाज़ार, सरकार-आईटीबीपी में होगा एमओयू
गांव में ही मिलेगा रोज़गार, आईटीबीपी करेगी फल-सब्ज़ी सहित कृषि उत्पादों की खरीद
एएम नाथ। शिमला : हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) राज्य सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित करने जा रही है। इस समझौते के अंतर्गत आईटीबीपी स्थानीय स्तर पर उत्पादित ताज़ी सब्ज़ियां, फल, दूध, पनीर, मांस, ट्राउट मछली और अन्य कृषि उत्पाद सीधे किसानों, सहकारी समितियों और उत्पादकों से खरीदेगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनके गांवों में ही स्थायी बाज़ार उपलब्ध कराना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और ग्रामीणों के लिए रोज़गार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
इस विषय पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार देर शाम आईटीबीपी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा की। बैठक में उत्तरी फ्रंटियर के आईजी मनु महाराज और सेक्टर कमांडर डीआईजी पवन कुमार नेगी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए दूरदराज़ के बाज़ारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही आईटीबीपी को ताज़ा और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद नियमित रूप से उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे दोनों पक्षों को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह पहल न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
आईजी मनु महाराज ने बताया कि इस तरह की योजना पहले उत्तराखंड में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि हिमाचल प्रदेश में भी यह मॉडल सफल रहेगा और सीमावर्ती गांवों के लोग इसका भरपूर लाभ उठाएंगे।
बैठक के दौरान सीमावर्ती गांवों में बॉर्डर आउट पोस्ट के विद्युतीकरण को लेकर रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत भी चर्चा की गई। यह कदम न केवल आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करेगा, बल्कि सीमा क्षेत्रों में विकास को भी नई दिशा देगा।
