कर्मचारियों की जायज मांगें दबाने के लिए एस्मा का प्रयोग अनुचित
बोले, संवाद से निकाले समाधान, दमन से नहीं
एएम नाथ। शिमला : अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ हिमाचल प्रदेश के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) कर्मचारियों पर अनिवार्य सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू किए जाने की कड़ी आलोचना करते हुए इसे कर्मचारियों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का दमन बताया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की वर्षों से लंबित वित्तीय मांगों को दबाने के लिए ऐसे कठोर कानून का प्रयोग उचित नहीं है।
डॉ. पुंडीर ने जारी बयान में कहा कि एस्मा का उपयोग सामान्यतः आपातकालीन या गंभीर परिस्थितियों में आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिए किया जाता है। लेकिन कर्मचारियों के वैधानिक देयों और वित्तीय अधिकारों की मांग को रोकने के लिए इस कानून का सहारा लेना संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान खोजने के बजाय दमनात्मक कदम नहीं उठाने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित समस्याओं को हल करने में विफल रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कर्मचारियों की आवाज सुनना और उनकी जायज मांगों का समयबद्ध समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि परिवहन सेवाओं को अनिवार्य माना जाता है तो उन सेवाओं को संचालित करने वाले कर्मचारियों के अधिकारों और उनके मेहनत से अर्जित धन को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
डॉ. पुंडीर ने कहा कि एचआरटीसी कर्मचारियों से संबंधित मामलों में न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देशों का सम्मान किया जाना चाहिए तथा कर्मचारियों के लंबित वित्तीय देयों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार से कर्मचारियों के बकाया वित्तीय लाभ जल्द जारी करने और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करने की मांग की।
