कांगड़ा-चंबा में बराबरी की टक्कर : लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-भाजपा ने सात-सात बार हासिल की है जीत

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एएम नाथ। चम्बा  :   कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट के अब तक हुए चुनावों में कांग्रेस व भाजपा के बीच मुकाबला बराबरी पर रहा है। कांगडा चंबा संसदीय सीट से कांग्रेस व भाजपा ने सात-सात बार बाजी मारी है। इस संसदीय सीट से सर्वाधिक चार जीत का रिकार्ड भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार के नाम रहा है। इस सीट से शांता कुमार चार बार सांसद चुने गए हैं। इस सीट से केंद्रीय कैबिनेट में स्थान पाने का रिकार्ड भी शांता कुमार के नाम है।
पिछले तीन चुनावों से कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट पर भाजपा ने कब्जा जमाया हुआ है। इस बार के चुनावों में जहां भाजपा इस सीट से लगातार चौथी बार जीत लेकर फील्ड में जुटी हुई है वहीं कांग्रेस मुकाबला जीतने को लेकर काम कर रही हैं। ऐसे में अब 2024 के लोकसभा चुनावों में मतदाता किस दल के प्रत्याशी को चुनकर संसद की दहलीज पार करवाते हैं यह अभी भविष्य की गर्भ में छिपा हुआ है।
1984 तक लगातार कांग्रेस का रहा कब्जा :  वर्ष 1951 में कांगडा-चंबा संसदीय सीट के पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हेमराज सांसद चुने गए थे। हेमराज ने इस सीट से 1951, 1962 तथा 1967 के चुनाव जीतकर संसद की दहलीज लांघी। 1957 में इस सीट से कांग्रेस की टिकट पर दलजीत सिंह चुनाव लडक़र सांसद बने थे। 1977 में बीएलडी के टिकट पर दुर्गा चंद इस सीट से सांसद चुने गए। 1980 में कांग्रेस ने इस सीट पर फिर से कब्जा जमाया। 1984 में इस सीट के कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी पहली महिला सांसद चुनी गई।
भाजपा ने 1989 में खोला था खाता :  1989 में इस सीट पर पहली बार भाजपा ने जीत का परचम लहराया। इन चुनावों में शांता कुमार ने जीत दर्ज कर भाजपा कर खाता खुलवाया। 1991 में भाजपा के डीडी खजूरिया सांसद चुने गए। मगर 1996 के चुनावों में कांग्रेस ने एक बार फिर भाजपा को पटखनी देकर सीट पर कब्जा कर लिया।
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