फतेहगढ़ साहिब : पंजाब में कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने की कवायद के बीच प्रभारी भूपेश बघेल वीरवार को चंडीगढ़ पहुंच गए हैं। शुक्रवार से जिलों में बैठकों का दौर शुरू हो रहा है और इसकी शुरुआत फतेहगढ़ साहिब से होगी। वर्करों से फीडबैक, 2027 की तैयारी और सबसे अहम, गुटबाजी पर लगाम। लेकिन फतेहगढ़ साहिब में बघेल के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है।
जिले में टिकट को लेकर घमासान खुलकर सामने आ चुका है। फतेहगढ़ साहिब हलके में पूर्व विधायक कुलजीत सिंह नागरा को मजबूत दावेदार माना जाता है, तो दूसरी तरफ पंजाब एनएसयूआई के प्रधान ईश्वरप्रीत सिंह सिद्धू भी लगातार दावेदारी जता रहे हैं। दोनों के बीच सार्वजनिक मंचों से आरोप-प्रत्यारोप और सोशल मीडिया पर पोस्ट वार आम हो चुकी है।
इससे भी दिलचस्प स्थिति बस्सी पठाना में है। यहां पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह अलग ही तेवर अपनाए हुए हैं। वह खुद को आगामी चुनाव में पार्टी प्रत्याशी तक घोषित कर चुके हैं। मई में हुए नगर कौंसिल चुनावों में उन्होंने अपने समर्थकों को आजाद उम्मीदवार के तौर पर उतार दिया था।
जिला कांग्रेस कमेटी के साथ उनका टकराव चर्चा में रहता है। जिला प्रधान सुरिंदर सिंह रामगढ़ उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगा चुके हैं और पार्टी आलाकमान को शिकायत भी भेजी जा चुकी है।
अब बघेल की बैठक से ठीक पहले नया विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी की ओर से सभी फ्रंटल संगठनों को बुलाने की बात कही जा रही है, लेकिन ईश्वरप्रीत सिंह सिद्धू और डॉ. मनोहर सिंह दोनों का कहना है कि उन्हें बैठक की सूचना ही नहीं मिली। दोनों ने समर्थकों से चर्चा कर बैठक में शामिल होने पर फैसला लेने की बात कही है।
इस पर जिला प्रधान सुरिंदर सिंह रामगढ़ का तर्क है कि सभी जिला स्तरीय नेताओं को सूचना भेज दी गई है। ईश्वरप्रीत के बारे में उनका कहना है कि वह एनएसयूआई के पंजाब प्रधान हैं, उन्हें सूचना पंजाब कांग्रेस कमेटी देगी। डॉ. मनोहर सिंह के इंटक का पंजाब प्रधान होने के दावे पर भी उन्होंने सवाल उठाया।
रामगढ़ के अनुसार इंटक के पंजाब प्रधान अमृतसर के सुरिंदर शर्मा हैं और मंडी गोबिंदगढ़ से जिला प्रधान कृष्ण यादव को सूचना दे दी गई है। ऐसे में सवाल यही है कि जिस एकजुटता का संदेश देने भूपेश बघेल आ रहे हैं, क्या वह फतेहगढ़ साहिब में टिकट की इस खींचतान में संतुलन बैठा पाएंगे या गुटबाजी यूं ही पार्टी को दो फाड़ करती रहेगी।
