चंबा ने देश को बिजली दी, अब चंबा के हक की बारी : डॉ. हंस राज

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विधानसभा में हाइड्रो पावर परियोजनाओं से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए

विस्थापित परिवारों के मुआवजे, स्थानीय युवाओं को रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की मांग

एएम नाथ। शिमला : चंबा जिले के प्राकृतिक संसाधनों से देश और प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में स्थानीय लोगों का अहम योगदान रहा है। हाइड्रो पावर परियोजनाओं के लिए चंबा के लोगों ने अपनी जमीन, जंगल और अन्य प्राकृतिक संसाधन दिए हैं, लेकिन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के अधिकारों, उचित मुआवजे और स्थानीय लोगों को मिलने वाले लाभ का सवाल आज भी कायम है। चुराह के विधायक डॉ. हंस राज ने विधानसभा में हाइड्रो पावर परियोजनाओं से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाते हुए सरकार से प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि चंबा ने देश की प्रगति के लिए अपना योगदान दिया है और अब यहां के लोगों के हक को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
डॉ. हंस राज ने कहा कि हाइड्रो पावर परियोजनाओं के निर्माण से जिन परिवारों को विस्थापन और जमीन से जुड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है, उन्हें उचित और समयबद्ध मुआवजा मिलना चाहिए। प्रभावित परिवारों की समस्याओं का केवल कागजी स्तर पर समाधान करने के बजाय उन्हें वास्तविक राहत देने की आवश्यकता है। उन्होंने स्थानीय युवाओं के रोजगार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। विधायक ने कहा कि जिन क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल बिजली परियोजनाओं के लिए किया जा रहा है, वहां के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। स्थानीय युवाओं को अस्थायी रोजगार तक सीमित रखने के बजाय स्थायी रोजगार और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए ठोस नीति बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने हाइड्रो पावर परियोजनाओं के तहत मिलने वाले LAD और CSR फंड के सही इस्तेमाल का मुद्दा भी विधानसभा में उठाया। डॉ. हंस राज ने कहा कि इन निधियों का लाभ वास्तव में प्रभावित क्षेत्रों और स्थानीय जनता तक पहुंचना चाहिए। फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों के विकास में इन निधियों की अहम भूमिका हो सकती है, बशर्ते इनका सही और जरूरत के अनुसार इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए।
विधायक ने पर्यावरण संरक्षण को भी हाइड्रो पावर विकास का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि बिजली उत्पादन और विकास जरूरी है, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें स्थानीय लोगों का हक, रोजगार, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे। परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग के लिए प्रभावी तंत्र बनाया जाना चाहिए, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो और अनियमितताओं पर समय रहते कार्रवाई हो सके। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश के विकास के लिए अपनी जमीन और संसाधन दिए हैं, उन्हें उनका उचित अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए। जनता के मुद्दे विधानसभा में उठाना और उनके हक की आवाज बनना उनकी पहली जिम्मेदारी है।

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