एएम नाथ। शिमला : हिमाचल प्रदेश में किसी भी नए प्रोजेक्ट के निर्माण को आरंभ करने से पहले जल शक्ति विभाग की एनओसी मिलना अब आसान नहीं होगा। एनओसी जारी करने से पहले संबंधित एरिया में पानी की उपलब्धता का आकलन किया जाएगा, जिसके बाद ही जल शक्ति विभाग के अधिकारी प्रोजेक्ट को लेकर एनओसी जारी कर सकेंगे। विभाग के प्रदेश मुख्यालय की तरफ से इस संबंध में भी फील्ड अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रदेश में अब किसी भी नए प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले पानी की उपलब्धता की जांच अनिवार्य होगी।
इसको लेकर मुख्य सचिव की तरफ से आदेश जारी हुए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए जारी होने वाले एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट से पहले जल स्रोतों की स्थिति और पानी की उपलब्धता का सही आकलन किया जाएगा। इस बावत मुख्य सचिव ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट को निर्देश दिए गए थे। जिसके बाद डिपार्टमेंट ने जल शक्ति विभाग को मुख्य सचिव के आदेशों का हवाला देते हुए पत्र भेजा है, जिसमें कहा गया है कि राज्य में नए प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए पानी की उपलब्धता और उसकी स्थिरता एक जरूरी शर्त है। इसलिए इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
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सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश जारी
सरकार के आदेशों के बाद जल शक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय ने सभी फील्ड अधिकारियों को इसको लेकर निर्देश जारी कर दिए है। साथ ही अधिकारियों को कहा गया है कि जब किसी प्रोजेक्ट के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देने की प्रक्रिया चल रही हो, तब इन निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए। राज्य में बढ़ते प्रोजेक्टों के बीच जल संसाधनों का संतुलित उपयोग जरूरी है। इसलिए पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ही नए प्रोजेक्टों को अनुमति दी जाएगी।
