नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। दोनों नेताओं ने मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता से व्यापक विचार-विमर्श के बाद नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की है।
खरगे और राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा तरीके से की जा रही जाति जनगणना कांग्रेस को स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से तेलंगाना और बिहार में किए गए जाति सर्वेक्षणों से सीख लेने और अधिक वैज्ञानिक एवं सटीक प्रक्रिया अपनाने की अपील की।
मौजूदा प्रक्रिया को बताया ‘खानापूर्ति’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 25 अगस्त को पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार की मौजूदा कवायद पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे महज ‘खानापूर्ति’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर यह तीसरा पत्र है, लेकिन अभी तक किसी भी पत्र का जवाब नहीं मिला है।
उन्होंने बताया कि खरगे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री को हिंदी में यह पत्र भेजा था।
सटीक आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय अधूरा
पत्र में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए देश में जातियों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के सटीक आंकड़े होना जरूरी है।
उन्होंने मौजूदा व्यवस्था में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए अपनाए जा रहे ‘ओपन-एंडेड’ सवाल पर आपत्ति जताई। इस व्यवस्था में व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज किया जाएगा।
एक जाति के कई नामों से आंकड़े बिखरने का दावा
खरगे और राहुल गांधी ने तर्क दिया कि भारत में एक ही जाति को अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाई रूपों से जाना जाता है। ऐसे में यदि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा बताए गए नाम को अलग-अलग दर्ज किया गया तो एक ही जाति के आंकड़े सैकड़ों या हजारों अलग-अलग नामों में बंट सकते हैं।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक इससे जातियों की वास्तविक संख्या निर्धारित करना मुश्किल होगा और पूरी जाति जनगणना के आंकड़ों की उपयोगिता प्रभावित हो सकती है।
OBC की वास्तविक आबादी सामने नहीं आने का दावा
कांग्रेस ने कहा कि यदि किसी समुदाय की संख्या ही सही तरीके से दर्ज नहीं होगी तो उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सही आकलन भी संभव नहीं होगा। इसका असर विशेष रूप से पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों पर पड़ सकता है।
खरगे और राहुल गांधी ने दावा किया कि मौजूदा प्रक्रिया से देश में OBC की वास्तविक आबादी का सटीक आंकड़ा सामने नहीं आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जनगणना में ‘Backward Class’ यानी पिछड़ा वर्ग शब्द तक शामिल नहीं किया गया है।
‘ड्रॉप-डाउन’ सूची का सुझाव
कांग्रेस नेताओं ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में पहले से उपलब्ध सूची का इस्तेमाल किया जाता है।
इसी तरह सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की मौजूदा सरकारी सूचियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण की सूची के आधार पर जातियों की एक प्रमाणित सूची तैयार की जा सकती है। इसके बाद डिजिटल फॉर्म में ‘ड्रॉप-डाउन’ विकल्प के जरिए जाति का चयन कराया जा सकता है।
तेलंगाना और बिहार मॉडल अपनाने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों का हवाला देते हुए कहा कि वहां भी जातियों की पहचान के लिए व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई सूचियों की प्रतियां भी भेजी हैं।
दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रक्रिया उन्हें स्वीकार्य नहीं है और केंद्र सरकार को नई प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।
राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों से चर्चा की मांग
खरगे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से मांग की कि मौजूदा प्रश्नावली को वापस लेकर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और आम जनता से व्यापक परामर्श किया जाए। इसके बाद ऐसी नई प्रश्नावली तैयार की जाए, जिससे हर जाति और समुदाय की वास्तविक संख्या का अधिक सटीक आंकड़ा सामने आ सके।
जयराम रमेश ने सरकार पर फिर साधा निशाना
जयराम रमेश ने कहा कि जाति जनगणना की अधिसूचना में कुल 40 सवाल पूछे जाने की बात कही गई है और दसवां सवाल जाति से संबंधित होगा। उन्होंने मौजूदा प्रक्रिया को सामाजिक न्याय के लिहाज से प्रभावी नहीं बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।
रमेश के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहली बार 16 अप्रैल 2023 को प्रधानमंत्री को जाति जनगणना के संबंध में पत्र लिखा था। इसके बाद 5 मई 2025 को उन्होंने दोबारा विस्तृत पत्र भेजकर कई सुझाव दिए थे।
