मानसा कोर्ट ने लक्खा सिधाना और मोहनजीत सिंह शेरों की रिहाई के आदेश दिए; सरकार 2 करोड़ मुआवजा और पत्नी को योग्यता के आधार पर नौकरी देगी
मानसा। एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद 23 दिनों से जारी गतिरोध के बीच परिवार पोस्टमार्टम करवाने के लिए सहमत हो गया है। झोटा का पोस्टमार्टम 6 नवंबर को चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में किया जाएगा। हालांकि, उनका अंतिम संस्कार किस दिन होगा, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इस बीच मानसा कोर्ट ने गुरुवार को अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के नेता लक्खा सिंह सिधाना और मोहनजीत सिंह शेरों को तुरंत रिहा करने के आदेश जारी किए। अदालत ने नाभा जेल के सुपरिंटेंडेंट को निर्देश दिया कि दोनों की किसी अन्य मामले में जरूरत नहीं है।
सरकार के साथ बैठक में बनी थी सहमति
इससे पहले 4 नवंबर को मानसा में झोटा के परिवार और संयुक्त कार्रवाई समिति के प्रतिनिधियों की विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां तथा कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के साथ करीब पांच घंटे बैठक हुई थी। इसमें मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे की मांग को छोड़कर अन्य मांगों पर सहमति बनी थी।
समझौते के तहत सरकार झोटा के परिवार को दो करोड़ रुपये मुआवजा देगी। उनकी पत्नी को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है।
पिता और एंटी-ड्रग टास्क टीम पर दर्ज केस होंगे रद्द
सरकार ने झोटा के पिता और एंटी-ड्रग टास्क टीम के सदस्यों पर दर्ज मामले रद्द करने पर भी सहमति जताई है। इसके अलावा मानसा में झोटा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी और उनके नाम पर गांव ख्याला में ट्रॉमा सेंटर बनाया जाएगा।
जेल में बंद लक्खा सिधाना सहित अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई का रास्ता भी समझौते के बाद साफ हुआ। इसके चलते 5 नवंबर को संगरूर में मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।
13 अक्टूबर को हुई थी हत्या
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित दवा की दुकान के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद से उनका शव मानसा सिविल अस्पताल के शवगृह में रखा हुआ था। परिवार और विभिन्न संगठनों ने पोस्टमार्टम तथा अंतिम संस्कार से पहले अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए आंदोलन शुरू किया था। अब समझौते और अदालत के आदेशों के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
