नशे की ओवरडोज से मौत के बाद शव लेकर प्रदर्शन में जा रहे परिजनों पर लाठीचार्ज का आरोप; पीजीआई चंडीगढ़ में दोबारा पोस्टमार्टम और परिवार की सुरक्षा की मांग, सोमवार को होगी सुनवाई
चंडीगढ़। पंजाब के मानसा जिले के भम्मे कलां गांव में नशे की ओवरडोज से युवक दलजीत सिंह की मौत के बाद शव को लेकर विवाद गहरा गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि शव लेकर प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे परिवार और ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया तथा शव को अपने कब्जे में ले लिया। तीन दिन से अधिक समय बीतने के बावजूद परिवार को शव नहीं सौंपे जाने का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है।
मृतक की बहन अमरजीत कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पूरे मामले की सीबीआई जांच करवाने, पीजीआई चंडीगढ़ में स्वतंत्र चिकित्सकों के बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम कराने और परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। शनिवार को याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई, लेकिन अदालत ने सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित कर दी। इस दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि फिलहाल दलजीत सिंह का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन में जा रहे परिवार पर लाठीचार्ज का आरोप
याचिका के अनुसार, दलजीत सिंह की 27 अक्टूबर को नशे की ओवरडोज से मौत हुई थी। इसके बाद परिवार, पंचायत और गांव के लोग शव लेकर मानसा में चल रहे धरने में शामिल होने जा रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पुलिस की जवाबदेही तय हो।
आरोप है कि रामदित्ते वाला चौक पर पुलिस ने उनका रास्ता रोक लिया और बिना किसी उकसावे के लाठियां चलाईं। याचिका में दावा किया गया है कि मौके पर एसएसपी वैभव चौधरी सहित 100 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद थे। परिवार के सदस्यों और घटना की वीडियो बना रहे मीडियाकर्मियों के साथ भी मारपीट किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
शव वाहन से निकालकर कब्जे में लेने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने शव को वाहन से निकालकर अपने कब्जे में ले लिया। मृतक के पिता जरनैल सिंह पर मामला खत्म करने और अंतिम संस्कार करने का दबाव बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
परिवार का आरोप है कि मृतक की पत्नी परमजीत कौर और नाबालिग बेटे अरमान सिंह को पुलिस स्टेशन सिटी-1 ले जाया गया और आधी रात के बाद छोड़ा गया।
सीबीआई जांच और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
अमरजीत कौर ने याचिका में मामले की स्वतंत्र जांच सीबीआई से करवाने के साथ संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा शव परिवार को सौंपने और पीजीआई चंडीगढ़ में स्वतंत्र चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड से दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग रखी गई है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मृतक की गरिमा और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करने के अधिकार की रक्षा करने की भी अपील की गई है। अब इस मामले में सोमवार को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर परिवार और क्षेत्र के लोगों की नजरें टिकी हैं।
