चंडीगढ़: कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद डॉक्टर नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बना ली है। उनकी इस घोषणा के बाद यह साफ हो गया है कि वे बीजेपी में शामिल नहीं होने जा रही हैं, क्योंकि ऐसी अटकलें पहले लगाई जा रही थीं।
उन्होंने अपनी नई पार्टी का नाम “भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी” रखा है। इस पार्टी की घोषणा उन्होंने सोमवार को की।
सोशल मीडिया पर दी जानकारी
नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नई पार्टी की जानकारी लोगों के साथ साझा की। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि जिस घोषणा का लोग लंबे समय से इंतज़ार कर रहे थे, वह अब सामने आ गई है। उन्होंने बताया कि देश के मौजूदा राजनीतिक हालात और नेताओं के कामकाज को ध्यान से देखने और समझने के बाद उन्होंने एक नए विकल्प पर काम शुरू किया। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य अपना जीवन देश की सेवा में लगाना है और लोगों को उनका हक दिलाना है।
समान विचारधारा वाले लोगों के साथ शुरुआत
उन्होंने कहा कि यह एक तरह से ईश्वरीय प्रेरणा है, जिसने अलग-अलग राज्यों के समान सोच रखने वाले लोगों को एक साथ जोड़ा है। ये लोग क्षमता, आत्मविश्वास, साहस और दृढ़ संकल्प के साथ काम करने के लिए तैयार हैं।
इनका मुख्य लक्ष्य है समाज में न्याय और शांति लाना, प्रेम और सकारात्मक सोच के जरिए बदलाव लाना। लोगों के जीवन में आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देना। उन्होंने यह भी कहा कि वे ‘उच्च चेतना’ (Higher Consciousness) के साथ काम करेंगे और वही करेंगे जो ईश्वर (वाहेगुरु) उनसे चाहता है।
पंजाब को फिर से “स्वर्ण राज्य” बनाने का लक्ष्य
नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि उनकी पार्टी का एक बड़ा लक्ष्य पंजाब को उसकी पुरानी पहचान वापस दिलाना है। वे पंजाब को फिर से “स्वर्ण राज्य” (Golden State) बनाना चाहती हैं, जहां हर क्षेत्र में विकास हो और लोग खुशहाल जीवन जी सकें।
पंजाब के लिए उनका विजन
उन्होंने बताया कि वे पंजाब को एक ऐसा राज्य बनाना चाहती हैं जहां लोग आपसी प्रेम और भाईचारे से रहें। सभी को न्याय मिले। हर व्यक्ति को स्वतंत्रता और अपने अधिकारों का एहसास हो। लोग बिना किसी बाहरी दबाव के काम कर सकें। निस्वार्थ सेवा और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा मिले। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी एक ऐसी सरकार बनाना चाहती है जो पूरी तरह से जनता के लिए काम करे। उनका लक्ष्य है कि सरकार आम लोगों की जरूरतों और उम्मीदों के अनुसार काम करे। यानि, उनकी सोच एक ऐसी व्यवस्था बनाने की है जो जनता की हो, जनता के लिए हो और जनता द्वारा चलाई जाए।
