पढ़ाने की बजाय ऑनलाइन हाज़िरी के चक्कर में उलझाए गए शिक्षक : एम.स्टार ई पंजाब  ऐप को तुरंत बंद करने की मांग : डीटीएफ

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शिक्षकों को बनाया गया डेटा एंट्री ऑपरेटर
गढ़शंकर, 10 अप्रैल : राज्य के सरकारी स्कूलों में एम.स्टार ई पंजाब के माध्यम से लागू की जा रही ऑनलाइन हाज़िरी प्रणाली जहां शिक्षकों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है, वहीं शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को दिए जाने वाले कीमती समय को भी कम कर रही है। जहां इस प्रणाली का उद्देश्य स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया जा रहा है, वहीं जमीनी हकीकत में शिक्षकों को कई तकनीकी और प्रबंधकीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट पंजाब के राज्य संयुक्त सचिव मुकेश कुमार, जिला प्रधान सुखदेव सिंह डानसीवाल ने बताया कि एम स्टार ई पंजाब नाम के ऐप को शिक्षा विभाग ने हिताची एमजी राम नेट लिमीटड नाम की  निजी कंपनी के साथ मिलकर बनाया है। इस मोबाइल ऐप के माध्यम से हर रोज निर्धारित समय में हाज़िरी लगाना शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यदि स्कूलों में दाखिले चल रहे हैं तो शिक्षक बच्चों का दाखिला कर रहे हैं, लेकिन विभाग के उच्च अधिकारी शिक्षकों और स्कूल मुखियों को बच्चों की हाज़िरी न भेजने के संदेश भेजकर परेशान कर रहे हैं। यहां तक कि स्कूल मुखी और शिक्षक आज सेमिनार में होने के बावजूद उन्हें यह संदेश किया जा रहा है कि बच्चों की हाज़िरी की रिपोर्ट भेजो।

पूरे राज्य में एक ही समय पर ऐप चलने के कारण सर्वर व्यस्त हो जाता है और हाज़िरी नहीं लगती, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि शिक्षक स्कूल में समय पर हाज़िर हो जाते हैं तो बाद में यह उन्हें अपने आप ही गैर-हाज़िर कर देता है और फिर से हाज़िर होने के लिए मजबूर करता है। शिक्षकों ने बताया कि गांवों में इंटरनेट की गति बहुत धीमी है या कई बार नेटवर्क ही उपलब्ध नहीं होता। इस कारण अनेक शिक्षक समय पर हाज़िरी दर्ज नहीं कर पाते।
शिक्षक नेताओं ने जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा अलग-अलग समय पर ई पंजाब, आईएचआरएमएस, दीक्षा, पंजाब एजू केयर, परशशत ऐप आदि इंस्टॉल करने के आदेश दिए जाते रहते हैं। इन ऐप्स के माध्यम से विभिन्न प्रकार की जानकारियां मांगी जाती हैं। इसके अलावा हर रोज कोई न कोई गूगल शीट भरने के आदेश दिए जाते हैं जिन्हें शिक्षकों द्वारा भरा जाता है। इन ऐप्स/गूगल शीट्स के माध्यम से डेटा इकट्ठा करने की नीति ने शिक्षकों को उनके असली काम पढ़ाने से हटाकर उन्हें डेटा एंट्री ऑपरेटर बना दिया है, जिसका अंतिम नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है। विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए पहले से चल रहे ई पंजाब पोर्टल को बंद करने की ओर बढ़ा जा रहा है, जिसमें सभी शिक्षकों ने महारत हासिल कर ली थी।

शिक्षक नेताओं ने कहा कि भले ही डीटीएफ तकनीक के उपयोग के पक्ष में है, लेकिन विभाग द्वारा इसकी अत्यधिक उपयोग के कारण शिक्षकों को विद्यार्थियों से दूर करना बिल्कुल सही नहीं है। उन्होंने विभाग से मांग की कि विभाग रोज नए प्रयोग करना बंद करे, आंकड़ों की प्राप्ति के लिए हर स्कूल में डेटा एंट्री ऑपरेटर की पोस्ट दे और शिक्षकों को उनके मुख्य कार्य शिक्षा देने के लिए समय दे तथा ऐप्स और गूगल शीट्स से दूर रखे।

फोटो : डीटीएफ के राज्य संयुक्त सचिव मुकेश कुमार व जिला प्रधान सुखदेव सिंह डानसीवाल।

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