भाजपा ने पंजाब में पूरी तरह बदली रणनीति : तरुण चुग पर लगाया दिया दांव

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चंडीगढ़ : भारतीय जनता पार्टी ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने संगठन में व्यापक बदलाव किए हैं। इस रणनीतिक फेरबदल के तहत पार्टी ने नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

सबसे बड़ा बदलाव प्रदेश नेतृत्व में देखने को मिला है, जहां सुनील जाखड़ की जगह जट्ट सिख चेहरे केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सांगठनिक बदलावों के इसी सिलसिले में पार्टी ने राज्यसभा के लिए तरुण चुघ को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। हाल ही में भाजपा द्वारा जारी की गई 11 सीटों की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का नाम शामिल नहीं है, जिससे राज्य की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पंजाब भाजपा के कद्दावर नेता और राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को पार्टी ने राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। अमृतसर के मूल निवासी तरुण चुघ लंबे समय से बीजेपी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते आ रहे हैं। वर्तमान में वह पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य में अत्यधिक सक्रिय हैं और साल 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करने में जुटे हैं। चुघ इससे पहले 2012 और 2017 में बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, हालांकि उन्हें इन चुनावों में सफलता नहीं मिल सकी थी। इसके बावजूद संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और लगातार किए गए कार्यों को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उच्च सदन भेजने का निर्णय लिया है। इसके जरिए बीजेपी ने पंजाब में अपने पारंपरिक हिंदू वोट बैंक को भी एक बड़ा और सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है।

रवनीत बिट्टू के सियासी भविष्य पर सस्पेंस :  केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राजस्थान से राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त होने जा रहा है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना सीट से कांग्रेस उम्मीदवार राजा वड़िंग के हाथों पराजित होने के बाद भी बीजेपी ने उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में शामिल कर राजस्थान से राज्यसभा भेजा था। अब दोबारा राज्यसभा का टिकट न मिलने के कारण तकनीकी रूप से वह छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर नहीं रह सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि संगठन में बदलाव के बाद जून महीने में होने वाले केंद्रीय कैबिनेट विस्तार में बिट्टू की छुट्टी हो सकती है। हालांकि, बिट्टू इस स्थिति को भांपते हुए पहले ही बयान दे चुके हैं कि संसदीय राजनीति में 17 साल बिताने के बाद अब वह पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं और दिल्ली से अपना बोरिया-बिस्तर समेट चुके हैं।

सुनील जाखड़ की भूमिका को लेकर भी अब अटकलें : सुनील जाखड़ को पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष पद से हटाए जाने और राज्यसभा की रेस से बाहर रखने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल कांग्रेस भी इस स्थिति पर तंज कसने से पीछे नहीं हट रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के पास जाखड़ के लिए अलग योजनाएं हैं। पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें एक प्रमुख चेहरे के रूप में चुनावी मैदान में उतार सकती है।

बीजेपी की नई चुनावी रणनीति :  इन तमाम बदलावों से साफ है कि भारतीय जनता पार्टी इस बार पंजाब में पूरी तरह से बदली हुई रणनीति के साथ उतर रही है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह भविष्य में शिरोमणि अकाली दल जैसी किसी भी क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी और सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। बीजेपी अब महज शहरी हिंदू मतदाताओं तक सीमित न रहकर ग्रामीण क्षेत्रों और सिख मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। केवल सिंह ढिल्लों को कमान सौंपकर पार्टी ने नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है। आने वाले समय में बीजेपी पंजाब की सियासत में कई नए चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है।

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