यूजीसी रेगुलेशन 2026 के विरोध में अंब में स्वर्ण समाज का महामार्च : करीब 2 हजार लोग हुए शामिल, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री और राज्यपाल के नाम एसडीएम के माध्यम से सौंपा ज्ञापन

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रोहित जसवाल।  अंब (ऊना)। ऊना जिले के अंब उपमंडल में शुक्रवार को स्वर्ण समाज ने यूजीसी रेगुलेशन 2026 के विरोध में महामार्च निकाला। आयोजकों के अनुसार मार्च में करीब 2 हजार युवाओं, छात्रों और समाज के लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा यूजीसी नियमों को लेकर आपत्तियां जताते हुए इन्हें वापस लेने अथवा छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बदलाव करने की मांग की।

छात्र हितों को प्राथमिकता देने की मांग

महामार्च के बाद प्रदर्शनकारियों ने उपमंडलाधिकारी (ना.) अंब के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी रेगुलेशन 2026 के मौजूदा स्वरूप को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े नियमों का सीधा असर विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवाओं के भविष्य पर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े किसी भी नीतिगत फैसले में छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

आयोजकों की मेहनत से जुटी बड़ी भीड़

महामार्च को सफल बनाने में अजय शर्मा, सुनील ठाकुर, मुनीश शर्मा, विवेक शर्मा और सुनीश डढवाल सहित अन्य आयोजकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजकों ने बताया कि महामार्च से पहले लगातार लोगों से संपर्क कर उन्हें इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को उन्होंने अभियान के प्रति समर्थन के रूप में बताया।

यूजीसी रेगुलेशन वापस लेने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी रेगुलेशन 2026 को तत्काल वापस लेने अथवा इसमें छात्रों के हितों के अनुरूप जरूरी संशोधन करने की मांग रखी। उनका कहना था कि उच्च शिक्षा से जुड़े नियम बनाते समय विद्यार्थियों और शोधार्थियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

एससी/एसटी एक्ट में अग्रिम जमानत का मुद्दा भी उठाया

महामार्च के दौरान एससी/एसटी एक्ट को लेकर भी मांग उठाई गई। ज्ञापन में एक्ट के तहत अग्रिम जमानत का प्रावधान किए जाने की मांग रखी गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कानून के निष्पक्ष क्रियान्वयन और सभी पक्षों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कानूनी प्रावधानों पर विचार किया जाना चाहिए।

महामार्च के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें प्रशासन के जरिए केंद्र और राज्य सरकार तक पहुंचाईं और यूजीसी से संबंधित नियमों पर पुनर्विचार की मांग की।

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