व्यवस्था परिवर्तन की मिसाल, बजट में गद्दी समुदाय के लिए ऐतिहासिक निर्णय: मनोज कुमार

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एएम नाथ। धर्मशाला, 23 मार्च: वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार धर्मशाला स्थित होटल कुणाल में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए के महान शहीदों को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को उनकी शहादत दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन वीर सपूतों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और आज हम सभी का कर्तव्य है कि उनके सपनों के भारत को मजबूत बनाए रखें।
मनोज कुमार ने हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और उन्होंने गांवों की वास्तविक समस्याओं को नजदीक से देखा और समझा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बजट में किसानों, बागवानों, पशुपालकों, भेड़पालकों और विशेष रूप से गद्दी समुदाय की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि गद्दी समुदाय का भेड़पालन व्यवसाय केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री को 14 बिंदुओं पर आधारित एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा था, जिसमें भेड़पालकों की मूलभूत समस्याओं और उनके समाधान का उल्लेख किया गया था।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मात्र 10-11 महीनों के भीतर ऊन के समर्थन मूल्य में 30 रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर इसे 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय गद्दी समुदाय के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है और इससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने ऊन की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए बजट में 2 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है, जिससे यदि बाजार में कीमत कम होती है तो भेड़पालकों को नुकसान न उठाना पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1970 से लंबित भेड़-बकरी परमिट की समस्या को भी सरकार गंभीरता से सुलझाने जा रही है, जिससे नए युवाओं को इस व्यवसाय में आने का अवसर मिलेगा और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
मनोज कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा भेड़पालकों के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से एक व्यापक और दूरदर्शी प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया गया है, जिसमें भेड़पालकों के लिए 10 लाख रुपये का जीवन बीमा मिल पाएगा, जिससे जोखिम भरे क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों को सुरक्षा मिलेगी। इसके अलावा बाॅर्डर क्षेत्रों में जाने वाले भेड़पालकों को 20 हजार रुपये प्रति वर्ष तथा अन्य क्षेत्रों में जाने वालों को 10 हजार रुपये प्रति वर्ष का वार्षिक प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही गद्दी नस्ल के कुत्तों एवं स्थानीय बकरी प्रजातियों के संरक्षण हेतु विशेष योजनाएं चलाई जायेंगी। भेड़पालकों के माइग्रेटरी ट्रैकों का विकास किया जायेगा, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इको-टूरिज्म के तहत शेल्टर निर्माण किया जाएगा, जिससे भेड़पालकों और पर्यटकों दोनों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि आॅर्गेनिक मीट एवं डेयरी उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल डेटा कलेक्शन की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने भेड़-बकरी चोरी की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्ती बरती है, जिससे इन घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि माइग्रेटरी रूट्स पर प्लांटेशन कार्यों को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
मनोज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री का उद्देश्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन लाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में और भी बड़े और प्रभावी निर्णय लिए जाएंगे, जिससे भेड़पालन व्यवसाय को नई दिशा मिलेगी और गद्दी समुदाय का सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा। सरकार के इन प्रयासों से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध परंपरा और संस्कृति भी सुरक्षित एवं संरक्षित रहेगी
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