शहीद होने के बाद भी ड्यूटी पर! भारतीय सेना का वो जवान जिसकी आत्मा आज भी कर रही देश की रक्षा

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नई दिल्ली :   स्थिति कैसी भी हो, हमारे सैनिक देश की सीमाओं को हर समय बचाते हैं। वे अपने परिवार से दूर रहकर भीषण गर्मी, बारिश और सर्दी में भी हमारे देश को बचाते हैं। देश की सुरक्षा करते हुए बहुत से सैनिक शहीद भी हो जाते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक सैनिक शहीद होने के बाद भी देश की रक्षा कर रहा है? इस शहीद सैनिक का मंदिर भी बना हुआ है। सेना ही इस मंदिर की देखभाल करती है। इस शहीद सैनिक को मासिक वेतन भी मिलता है। इन सैनिक का नाम बाबा हरभजन सिंह है। ऐसा माना जाता है कि बाबा हरभजन सिंह आज भी सिक्किम सीमा पर देश की सुरक्षा कर रही हैं। पंजाब रेजिमेंट के जवान बाबा हरभजन सिंह की आत्मा पिछले 50 साल से भी अधिक समय से देश की सीमा की रक्षा कर रही है, ऐसा लोगों का मानना है।

बाबा हरभजन रखते हैं दुश्मन की पूरी जानकारी:
बाबा हरभजन सिंह के मंदिर में तैनात सैनिकों का मानना है कि बाबा हरभजन सिंह पहले ही चीन की तरफ से आने वाले किसी भी खतरे की सूचना पहले ही दे देते हैं। यह भी कहा जाता है कि बाबा हरभजन सिंह पर भारतीय और चीनी सैनिकों दोनों का पूरा भरोसा है। यही कारण है कि बाबा हरभजन के लिए भारत-चीन फ्लैग मीटिंग में अटेंड करने के लिए एक खाली कुर्सी रखी जाती है।

पंजाब रेजिमेंट में थे बाबा हरभजन सिंह:
बाबा हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को पाकिस्तान के गुंजरावाल पंजाब के सदराना गांव में हुआ था। भारतीय सेना में उन्हें ‘नाथुला के नायक’ कहा जाता है। 1966 में, हरभजन सिंह 23वीं पंजाब रेजिमेंट में जवान बन गए। 2 साल बाद उन्हें सिक्किम में नियुक्त किया गया, लेकिन एक दुर्घटना में वह शहीद हो गए। बताया जाता है कि एक दिन हरभजन सिंह अपने खच्चर पर बैठकर नदी पार कर रहे थे, तभी वे खच्चर सहित नदी में बह गए। उनका मृत शरीर नदी में बहकर बहुत दूर चला गया।

साथी के सपने में आए बाबा हरभजन सिंह:
बहुत तलाशने पर भी उनका शव नहीं मिला। बाद में एक दिन बाबा हरभजन अपने एक साथी सैनिक के सपने में आए और बताया कि उनका शव कहाँ है। उस सैनिक ने अपने दोस्तों को सपने के बारे में बताया। बाद में कुछ सैनिक उस स्थान पर गए, वहां उन्हें हरभजन सिंह का शव मिला। बाबा हरभजन का पूरे राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया। बाद में साथी सैनिकों ने बाबा हरभजन के बंकर को मंदिर बनाया।

कहाँ बाबा हरभजन का मंदिर है?
सेना ने उनके लिए एक सुंदर मंदिर बनाया। इस मंदिर का नाम ‘बाबा हरभजन सिंह मंदिर’ है। बाबा हरभजन सिंह का मंदिर गंगटोक में 13000 फीट की ऊंचाई पर जेलेप्ला और नाथुला दर्रे के बीच स्थित है। पुराना बंकर मंदिर इससे भी एक हजार फीट की ऊंचाई पर है।

हर महीने भुगतान मिलता है:
सैनिकों का मानना है कि बाबा हरभजन की आत्मा आज भी सीमा पर सेवा कर रही है। बाबा हरभजन सेना में एक उच्च पद पर हैं और उन्हें हर महीने वेतन भी मिलता है। कुछ साल पहले तक बाबा हरभजन को अन्य सैनिकों की तरह हर साल दो महीने की छुट्टी पर उनके गांव भेजा जाता था। उनका सामान गांव भेजा जाता था और ट्रेन में उनकी सीट सुरक्षित रखी जाती थी। लेकिन कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद बाबा हरभजन को छुट्टी पर भेजना बंद कर दिया।

कपड़ों में मिलती हैं सलवटें!
मंदिर में बाबा हरभजन सिंह का एक कमरा भी है, जहां हर दिन सफाई की जाती है और बिस्तर लगाया जाता है। कहा जाता है कि बाबा की सेना की वर्दी और जूते उस कमरे में रखे जाते हैं। लोगों का कहना है कि हर दिन सफाई करने पर भी उनके जूतों में कीचड़ और चद्दर पर सलवटें मिलती हैं।

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