रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला, छावनीवासियों को नहीं मिलेगा मालिकाना हक
6 छावनियों के लाखों लोगों को झटका, सिर्फ प्रशासनिक अधिकारों का हस्तांतरण
एएम नाथ। शिमला : हिमाचल प्रदेश की छह छावनियों में रहने वाले लाखों लोगों की जमीन मालिकाना हक पाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि डिफेंस लैंड पर मालिकाना अधिकार केंद्र सरकार के पास ही रहेंगे। राज्य सरकार लंबे समय से छावनी क्षेत्रों की जमीन और प्रशासनिक नियंत्रण राज्य को सौंपने की मांग कर रही थी, लेकिन केंद्र ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।
जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने केवल नागरिक सुविधाओं और सीमित प्रशासनिक नियंत्रण के हस्तांतरण पर सहमति जताई है। यानी स्थानीय निकायों को सफाई, स्ट्रीट लाइट, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कुछ अधिकार मिल सकते हैं, लेकिन जमीन का स्वामित्व रक्षा मंत्रालय के अधीन ही रहेगा।
प्रदेश की जिन छह छावनियों को लेकर यह मामला सबसे अधिक चर्चा में है, उनमें लाखों लोग वर्षों से मालिकाना हक की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि पीढ़ियों से रहने के बावजूद वे अपनी जमीन के कानूनी मालिक नहीं बन पाए हैं, जिससे भवन निर्माण, बैंक ऋण और संपत्ति हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं में दिक्कतें आती हैं।
हिमाचल सरकार ने केंद्र से छावनी क्षेत्रों को नगर निकायों में शामिल करने और भूमि अधिकार देने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि रक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक महत्व का हवाला देते हुए जमीन पर अपना अधिकार बनाए रखने का फैसला किया है।
इस फैसले के बाद छावनी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और राज्य सरकार दोनों को निराशा हाथ लगी है। वहीं रक्षा मंत्रालय ने साफ संकेत दिए हैं कि डिफेंस लैंड पर केंद्र का एकाधिकार आगे भी जारी रहेगा।
