“सभी शर्तें पूरी, फिर भी जानबूझकर रोका जा रहा रजिस्ट्रेशन” — मनप्रीत अयाली; हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने की भी चेतावनी
चंडीगढ़। सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़े अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और दाखा विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने चुनाव आयोग पर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचने का आरोप लगाया है। वहीं, चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि पार्टी के पंजीकरण को लेकर कुछ राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आशंकाओं पर विचार किया जा रहा है।
अयाली ने गुरुवार को जारी वीडियो में कहा कि पार्टी ने रजिस्ट्रेशन के लिए निर्धारित सभी शर्तें पूरी कर दी हैं और फाइल चुनाव आयोग के पास है। उनके अनुसार प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी और प्रकाशन के बाद चुनाव चिह्न मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़नी थी, लेकिन इसे रोक दिया गया।
“पार्टी ने संविधान के दायरे में रहकर काम किया”
अयाली ने कहा कि पार्टी में पहले से दो सांसद और एक विधायक राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। उनका दावा है कि संगठन बनने के बाद ऐसी कोई गतिविधि नहीं हुई, जिसे संविधान के दायरे से बाहर माना जाए। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन रोकने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कोई ठोस आधार नहीं बताया गया है।
हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट में चुनाव आयोग ने पार्टी के आवेदन पर विचार जारी होने की बात कहते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कुछ आशंकाओं का हवाला दिया है। पार्टी ने इसी देरी को लेकर अदालत का रुख किया है। जुलाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने आयोग को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था।
जनसमर्थन रोकने के लिए देरी का आरोप
अयाली ने आरोप लगाया कि पार्टी को पंजाब में लोगों का समर्थन मिल रहा है और इसी कारण राजनीतिक दबाव में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी को औपचारिक मान्यता नहीं भी मिलती, तो उनके उम्मीदवार स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरेंगे।
अयाली ने कहा, “हमारे पास चुनाव लड़ने के और भी विकल्प हैं। पार्टी हर हाल में चुनाव लड़ेगी।”
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने की बात
अयाली के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन में देरी के खिलाफ पार्टी पहले ही हाईकोर्ट पहुंच चुकी है। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी उन्होंने कही। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। मांग नहीं माने जाने पर दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय या जंतर-मंतर पर धरना देने की चेतावनी भी दी गई है।
अयाली ने कहा कि पार्टी के साथ लंबे समय से भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने चंडीगढ़, बंदी सिखों की रिहाई और अमृतपाल सिंह की हिरासत जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन विषयों को लेकर पंजाब के एक वर्ग में केंद्र सरकार के प्रति असंतोष है।
नशामुक्त पंजाब और भाईचारे को बताया एजेंडा
अयाली ने पार्टी के एजेंडे का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब से नशे को खत्म करना तथा हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के बीच शांति और भाईचारा कायम रखना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन रोकने से पार्टी समर्थकों में रोष बढ़ रहा है। अयाली ने दोहराया कि पार्टी अदालतों पर भरोसा रखती है और जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई को आगे तक ले जाएगी।
जनवरी 2025 में दिया गया था आवेदन
दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार, अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के नाम से राजनीतिक दल के पंजीकरण के लिए आवेदन 22 जनवरी 2025 को दिया गया था। जुलाई 2026 में हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को इस मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।
अगस्त 2026 तक पार्टी को चुनाव आयोग से औपचारिक पंजीकरण और चुनाव चिह्न प्राप्त नहीं हुआ था, हालांकि पार्टी ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां और उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी थी।
