टैरिफ से टैक्स तक, आप सरकार की नीतियों ने उद्योगों का गला घोंटा: दीवान
लुधियाना, 19 जुलाई: जिला कांग्रेस कमेटी लुधियाना (शहरी) के पूर्व अध्यक्ष एवं पंजाब लार्ज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन पवन दीवान ने लुधियाना के औद्योगिक ढांचे की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आज यहां जारी एक कड़े बयान में दीवान ने कहा कि पंजाब की औद्योगिक राजधानी और “भारत का मैनचेस्टर” कहलाने वाला लुधियाना का विनिर्माण क्षेत्र लगातार गिरावट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि पिछले कुछ वर्षों में उद्योगों के लगातार पतन ने न केवल लुधियाना की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है, बल्कि इससे जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका भी संकट में पड़ गई है।
दीवान ने पंजाब के औद्योगिक पतन के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि एक समय था जब लुधियाना टेक्सटाइल, होजरी, साइकिल, ऑटो पार्ट्स, मशीन टूल्स, गारमेंट्स, ऊनी वस्त्र और प्लास्टिक सहित अनेक उद्योगों का मजबूत केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज गलत नीतियों के कारण यह औद्योगिक तबाही का उदाहरण बन गया है। उन्होंने कहा कि उत्पादन लागत में लगातार वृद्धि, महंगी बिजली, भारी करों और मंजूरियों की लंबी एवं जटिल प्रक्रिया ने बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों को बंद होने पर मजबूर कर दिया है, जिससे लुधियाना की औद्योगिक पहचान खोखली होती जा रही है।
दीवान ने कहा कि हालांकि पूरा औद्योगिक क्षेत्र संकट में है, लेकिन सबसे अधिक मार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पर पड़ी है, जो लुधियाना की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है। उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों के बंद होने और उद्योगों के दूसरे राज्यों में पलायन के कारण वे मजदूर, जो पहले सम्मानपूर्वक अपने परिवारों का पालन-पोषण करते थे, आज दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
इन परिस्थितियों के लिए दीवान ने केंद्र सरकार और पंजाब की आप सरकार, दोनों पर उद्योगों के प्रति लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी अनदेखी के कारण कई बड़े औद्योगिक घरानों ने अपने विस्तार परियोजनाएं उन राज्यों में ले जानी शुरू कर दी हैं, जहां उन्हें प्रोत्साहन, सस्ती बिजली और उद्योग-अनुकूल नीतियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब से बाहर जाने वाली प्रत्येक औद्योगिक इकाई इस बात का जीवंत प्रमाण है कि राज्य सरकार उद्योगों को संभालने में पूरी तरह विफल रही है।
दीवान ने कहा कि बहुप्रचारित पंजाब इन्वेस्ट समिट मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा हर वर्ष आयोजित किया जाने वाला केवल एक दिखावा है, जिसका उद्देश्य यह भ्रम पैदा करना है कि पंजाब में बड़े औद्योगिक निवेश आ रहे हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि महंगी बिजली, भारी करों और मंजूरियों की लंबी प्रक्रिया के कारण पंजाब में कोई नई औद्योगिक इकाई स्थापित नहीं हो रही है। भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार पर तंज कसते हुए दीवान ने कहा कि केवल साढ़े चार वर्षों में वर्तमान सरकार ने पंजाब के उद्योगों को विकास की गति देने के बजाय उल्टी दिशा में धकेल दिया है।
दीवान ने कहा कि पंजाब के लोग आगामी कुछ महीनों में होने वाले चुनावों में “अब तक की सबसे खराब सरकार” को सत्ता से बाहर करने के लिए पूरी तरह दृढ़ हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि कांग्रेस के सत्ता में वापस आने पर औद्योगिक क्षेत्र को पुनर्जीवित करने, निवेशकों का विश्वास बहाल करने और पंजाब को विकास एवं समृद्धि की राह पर दोबारा लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
