आरडीजी के मुद्दे पर पूरी भाजपा हिमाचल प्रदेश के हितों के खिलाफ़ : उपमुख्य सचेतक पठानिया

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एएम नाथ ।  धर्मशाला, 20 फ़रवरी : उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि भाजपा का आरडीजी पर असली चेहरा प्रदेश के सामने बेनकाब हो चुका है। विधानसभा सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश के लिए आरडीजी बहाल करने के लिए नियम 102 के तहत लाए गए सरकारी प्रस्ताव का विरोध कर भाजपा ने अपना वास्तविक चेहरा उजागर कर दिया है।

शुक्रवार को धर्मशाला में प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने भाजपा नेताओं से सवाल करते हुए कहा कि आरडीजी के मुद्दे पर एक बार भी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या भाजपा आरडीजी को बंद करने के पक्ष में है या नहीं? उन्होंने कहा कि इससे पहले आपदा प्रभावितों को विशेष आर्थिक सहायता देने संबंधी विधानसभा प्रस्ताव का भी भाजपा विधायकों ने समर्थन नहीं किया था। प्रदेश की जनता देख चुकी है कि भाजपा हिमाचल प्रदेश के अधिकारों के लिए कभी खड़ी नहीं होती।

उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता प्रदेश की जनता को स्पष्ट करें कि कुछ ही महीनों में उनका रुख क्यों बदल गया है। आखिर क्यों आज वह और पूरी भाजपा हिमाचल प्रदेश के हितों के खिलाफ खड़ी है? कांग्रेस सरकार का विरोध करते-करते भाजपा नेतृत्व शायद प्रदेश के लोगों के हितों को भूल चुका है। भाजपा नेता आज केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली धनराशि को आर्थिक मदद के रूप में गिना रहे हैं, जबकि यह प्रदेश की जनता का अधिकार है। इस प्रकार के बेतुके स्पष्टीकरण प्रदेश के लोगों के गले नहीं उतरने वाले। उन्होंने कहा कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 275(1) में किया गया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खु के नेतृत्व में हिमाचल सरकार ने पहले दिन से ही जनसेवा को सरकार का मूल मंत्र बनाया और इसी भावना के साथ हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए नए संसाधनों के सृजन पर बल दिया है। संसाधनों के सही इस्तेमाल से राज्य को पिछले तीन वर्षों में 26 हजार 683 करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई है।

बीबीएमबी परियोजनाओं में 12 प्रतिशत निःशुल्क ऊर्जा राॅयल्टी, हिमाचल प्रदेश की स्थायी सदस्यता तथा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार बकाया लगभग 6 हजार 500 करोड़ रुपये जारी करवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला को प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए धर्मशाला में ही पर्यटन निगम का राज्य मुख्यालय स्थानांतरित किया गया।

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