आरडीजी से गरमाई विधानसभा : मुख्यमंत्री सुक्खू और जयराम ठाकुर आमने-सामने

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एएम नाथ l शिमला : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के मुद्दे पर सदन में जोरदार बहस हुई। चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई और माहौल गर्म हो गया।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच सीधा टकराव देखने को मिला। वहीं, भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर और मुख्यमंत्री सुक्खू भी आमने-सामने हुए।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए बिक्रम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि केंद्र ने आरडीजी बंद कर हिमाचल के साथ बड़ा अन्याय किया है, लेकिन सरकार अपने खर्चों पर ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सलाहकारों और अतिरिक्त महाधिवक्ताओं की लंबी फौज खड़ी कर दी है। उन्होंने कहा कि जितनी चादर हो उतने ही पैर फैलाने चाहिए। बिक्रम ठाकुर ने यह भी कहा कि अगर पहले सरकार के पास पैसे थे तो चेयरमैन बनाए गए, अब आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं तो ऐसे पदों को खत्म करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सदन और रेस्ट हाउस का किराया बढ़ाया गया है, वहीं चेयरमैन का वेतन 30 हजार से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये कर दिया गया है।

इस पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उन्होंने चेयरमैन का वेतन नहीं बढ़ाया है और अगर विपक्ष के पास इससे जुड़े दस्तावेज हैं तो वे सदन में रखें। उन्होंने कहा कि निगमों और बोर्डों में नियुक्त चेयरमैन टैक्स देने वाले लोग हैं और यह उनकी कमाई का सवाल है। आरडीजी पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अनुदान सुधारों के लिए दिया गया था ताकि राज्य अपने संसाधन बढ़ा सके, लेकिन पिछली भाजपा सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को तीन साल में 17 हजार करोड़ रुपये की ग्रांट मिली, जबकि पिछली सरकार को 54 हजार करोड़ रुपये मिले थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 मार्च को 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को पारित किया जाना है और प्रदेश हित में विपक्ष को आरडीजी जारी रखने के लिए सहयोग करना चाहिए।

इसी दौरान मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच भी तीखी बहस हुई। बिक्रम ठाकुर के भाषण के दौरान मुख्यमंत्री के बार-बार हस्तक्षेप पर जयराम ठाकुर ने आपत्ति जताई और कहा कि यह ठीक परंपरा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब आरडीजी मिल रही थी तब भी कांग्रेस प्रधानमंत्री को लेकर बयान देती थी और अब बंद होने पर भी वही कर रही है। जयराम ठाकुर ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि उनकी सरकार को आरडीजी के रूप में 54 हजार करोड़ रुपये मिले और उससे पिछली सरकारों का कर्ज चुकाया गया। उन्होंने बताया कि 2018 में 6485 करोड़, 2019 में 7499 करोड़, 2020 में 7438 करोड़, 2021 में 7764 करोड़ और 2022 में 9090 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया गया। उनका दावा था कि भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में 95 प्रतिशत कर्ज चुकाया, जबकि मौजूदा सरकार ने तीन साल में 60 प्रतिशत ही कर्ज लौटाया है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने पलटवार करते हुए कहा कि आरडीजी प्रदेश का अधिकार है, कोई खैरात नहीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 23 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया, लेकिन 26 हजार करोड़ रुपये वापस भी किए। उनके अनुसार भाजपा सरकार ने 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया और 36 हजार करोड़ रुपये चुकाया। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार को कर्ज के अलावा 70 हजार करोड़ रुपये अलग से मिले थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर पहले वित्तीय अनुशासन रखा जाता तो कर्ज का बोझ कम किया जा सकता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरडीजी के मुद्दे पर कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ी तो प्रधानमंत्री से भी बात की जाएगी।

तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि कर्ज को लेकर श्वेत पत्र जारी किया जाए ताकि स्थिति साफ हो सके। उन्होंने भाजपा से अपील की कि यदि वह दिल्ली जाकर केंद्र से आरडीजी बहाल करने की मांग में साथ नहीं आना चाहती तो कम से कम सदन में प्रस्ताव पारित कर केंद्र से इसे जारी रखने की मांग करे। धर्माणी ने कहा कि सभी दलों का मकसद एक होना चाहिए कि आरडीजी को बहाल किया जाए और इसे समयबद्ध तरीके से बंद करने की स्पष्ट नीति बने ताकि प्रदेश आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने माना कि राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ खर्चों पर भी नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि एक बार यह अनुदान बंद हो गया तो दोबारा मिलना मुश्किल होगा।

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