विधानसभा में आरडीजी पर चर्चा : विपक्ष-सरकार आमने सामने, ओपीएस नहीं होगी बंद कहा मुख्यमंत्री ने

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एएम नाथ :  शिमला ।  16वें वित्त आयोग द्वारा हिमाचल प्रदेश सहित 17 राज्यों के लिए राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने के मुद्दे पर सोमवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में चर्चा शुरू हुई।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि इस विषय का उल्लेख पहले ही राज्यपाल के अभिभाषण में हो चुका है और बजट पर चर्चा के दौरान भी सदस्य इस पर अपने विचार रख सकते हैं, इसलिए अलग से सरकारी संकल्प लाकर चर्चा कराना उचित नहीं है। इसके बावजूद सरकार ने नियम 102 के तहत संकल्प सदन में पेश किया।

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद राज्य में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बंद नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली बोर्ड का निजीकरण नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से पूछा कि क्या वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मिलकर प्रदेश का पक्ष रखने को तैयार है। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों का दूरगामी असर होगा और सरकार इस मुद्दे पर पूरी मजबूती से लड़ाई लड़ेगी।

संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275 और 280 के तहत हिमाचल को 5वें से 15वें वित्त आयोग तक राजस्व सहायता अनुदान मिलता रहा है, लेकिन 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार ने इसे अगले वित्त वर्ष से बंद करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में आर्थिक संकट के हालात बन गए हैं। संकल्प में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए राजस्व घाटे के अनुरूप आरडीजी की राशि फिर से प्रदान की जाए।

चर्चा की शुरुआत करते हुए हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि प्रदेश की 75 लाख जनता के हितों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी मुआवजा बंद होने के बाद हिमाचल का केंद्रीय करों में हिस्सा पहले ही कम हो गया था और अब आरडीजी भी बंद होने जा रही है, जिससे वित्तीय स्थिति और कठिन हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि 15वें वित्त आयोग के दौरान हिमाचल को उदार सहायता मिली थी, लेकिन 16वें वित्त आयोग ने इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार ने अब तक का सबसे अधिक राजस्व अर्जित किया है।

उधर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुझाव सुनते नहीं हैं और यदि सुनते हैं तो मानते नहीं। उन्होंने सरकार को फिजूलखर्ची रोकने की सलाह दी और कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन और विकास कार्यों पर संकट आ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने सीपीएस को बचाने के लिए वकीलों पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं और कई चेयरमैनों का वेतन बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय प्रदेश पर 69,600 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।  ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि आरडीजी का मुद्दा राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रदेश के अधिकार से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से उबर रहे हिमाचल की तुलना बड़े और संसाधन सम्पन्न राज्यों से नहीं की जा सकती। वहीं भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह आरडीजी के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है और पहले फिजूलखर्ची पर लगाम लगाए।

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