इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना से बच्चों के भविष्य को मिल रही नई उड़ान : ऊना जिले में 2189 बच्चों को 2.61 करोड़ रुपये की मिली आर्थिक मदद

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रोहित जसवाल। ऊना, 15 जनवरी। हिमाचल प्रदेश सरकार की इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रभावी सामाजिक पहल बनकर उभरी है। यह योजना न केवल जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ रही है, बल्कि कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी ला रही है। ऊना जिले में इस योजना के तहत अब तक 2189 बच्चों को 2 करोड़ 61 लाख 48 हजार 722 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की दूरदर्शी सोच से शुरू की गई यह योजना विशेष रूप से उन बच्चों के लिए संबल बनी है, जिनकी माताएं विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता या निराश्रित हैं, अथवा जिनके माता-पिता 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता से पीड़ित हैं। सरकार ऐसे बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक 1000 रुपये प्रतिमाह की सहायता प्रदान कर रही है, जिससे उनकी शिक्षा, पोषण और बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
वहीं 18 से 27 वर्ष आयु वर्ग के वे विद्यार्थी जो उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और छात्रावास सुविधा से वंचित हैं, उन्हें 3000 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) नरेंद्र कुमार ने बताया कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ी राहत साबित हुई है, जहां बच्चों की पढ़ाई जारी रखना चुनौती बन गया था। उन्होंने बताया कि ऊना जिले के सभी विकासखंडों में इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच के अनुरूप योजना को जमीनी स्तर पर पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ लागू किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र बच्चा इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। योजना का वास्तविक प्रभाव लाभार्थी परिवारों के अनुभवों से स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है।
लाभार्थी तन्मय, जो वर्तमान में ग्यारहवीं कक्षा में अध्ययनरत हैं, बताते हैं कि पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई थी और उनकी पढ़ाई छूटने का डर सता रहा था। इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना ने उन्हें नया हौसला दिया और आज वे आत्मविश्वास के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने देख रहे हैं।
ऊना वार्ड नंबर-6 की पूजा पुरी बताती हैं कि पति के निधन के बाद दो बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो गया था, लेकिन छह माह में मिली 12 हजार रुपये की सहायता ने उन्हें बड़ा सहारा दिया। वहीं कोटला कलां की सरोज बाला और ऊना की रेणु देवी सहित अनेक महिलाओं ने इस योजना को अपने बच्चों के लिए संजीवनी बताते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का आभार व्यक्त किया है।
इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना आज न केवल आर्थिक सहायता का माध्यम है, बल्कि यह बच्चों को आत्मनिर्भर, शिक्षित और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार बन रही है।
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