एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी : शराब ठेके होंगे नीलाम, ठेकों पर 5 लीटर क्षमता की केग बीयर जाएगीबेची

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शिमला : मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में राज्य में आबकारी नीति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट में वर्ष 2023-24 के लिए नई आबकारी नीति को मंजूरी दी गई। नई आबकारी नीति के तहत खुदरा आबकारी दुकानों की नीलामी-सह-निविदा को स्वीकृति प्रदान की गई जिसका उद्देश्य सरकारी राजस्व में पर्याप्त वृद्धि, शराब के मूल्य में कमी तथा पड़ोसी राज्यों से इसकी तस्करी पर अंकुश लगाना है। प्रदेश में 6 साल बाद शराब ठेकों की नीलामी होगी।
कैबिनेट मीटिंग की ब्रिफिंग देते हुए उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन सिंह चौहान ने बताया कि मंत्रिमंडल ने कोविड सेस को खत्म करके काऊ सेस लगाने, प्रदेश में पुरानी बसों को रिप्लेस करके इलेक्ट्रिक बसें खरीदने और पावर प्रोजेक्ट पर सेस वसूलने के निर्णय को भी हरी झंडी दी है।
नई एक्साइज पॉलिसी मंजूर
कैबिनेट ने प्रदेश सरकार की नई एक्साइज पॉलिसी 2023-24 को मंजूरी प्रदान की। इसका उद्देश्य सरकार के राजस्व बढ़ोतरी, शराब के मूल्य में कमी और पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी रोकना शामिल है। शराब के ठेकों पर 5 लीटर क्षमता की केग बीयर बेची जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलेगा और वे बीयर की एक वई वैरायटी का भी आनंद ले पाएंगे। बागबानों को लाभाविन्त करने के लिए फलों के सम्मिश्रण से शराब की भी एक नई वैरायटी शुरू करने का फैसला लिया गया। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एल-3 एल-4 एल-5 लाइसेंस धारक होटल मालिकों को मिनी बार चलाने की अनुमति दी जाएगी।
पूर्व सरकार के समय एक बार भी शराब के ठेकों को नीलामी नहीं की गई। प्रदेश के सभी ठेकों को 10% हाइक देकर रिन्यू कर दिया जाता था। इस पर कांग्रेस ने हमेशा ही विरोध जताया और विधानसभा चुनाव के दौरान इस मामले को कांग्रेस ने अपने मुद्दों में भी शामिल रखा था।
वसूला जाएगा वाटर सेस पावर प्रोजेक्ट्स से : प्रदेश मंत्रिमंडल ने हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स से वाटर सेस वसूलने के मामले काे भी हरी झंडी दिखाई। प्रदेश में कुल 172 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स हैं। सरकार ने निर्णय लिया है कि इनसे 10 मार्च से लेकर वाटर सेस लिया जाएगा। इससे सरकार को एक हजार करोड़ से अधिक की आमदनी का अनुमान है। इसके लिए सरकार बजट सत्र में हिमाचल प्रदेश वाटर सेस ऑन हाइड्रो पावर जनरेशन बिल-2023 लाएगी। वाटर से वसूलने के लिए अलग से आयोग बनाने पर भी सहमति हुई। इसमें एक अध्यक्ष सहित 4 सदस्य बनाए जाएंगे। सरकार ने उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर ही पावर प्रोजेक्ट्स से वाटर सेस वसूलने का निर्णय लिया है।
कैबिनेट ने एचआरटीसी में 15 साल पूरा कर चुकी बसों को भी रिप्लेस करने की स्वीकृति प्रदान की है। इनकी जगह सरकार इलेक्ट्रिक बसों की खरीद करेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बसों की खरीद का प्रपोजल तैयार करने को कहा, जिसे अगली बैठक में पेश किया जाएगा।

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