एक जैसी आबो-हवा, फिर चुनावी नतीजों में ऐसा विरोधाभास क्यों?…..​ईवीएम बनाम बैलेट पेपर पर उठे गंभीर सवाल — चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव बैलेट पेपर से कराने की उठी मांग

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पुनीत महाजन I ​चंडीगढ़ : हाल ही में संपन्न हुए हरियाणा और पंजाब के स्थानीय नगर निकाय और नगर निगम चुनावों के चौंकाने वाले नतीजों ने आम जनता से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक को हैरान कर दिया है। पड़ोसी राज्य होने के नाते, जिनकी दीवार से दीवार सटीक सटती है, जो एक ही नहर का पानी पीते हैं और जिनकी सामाजिक-भौगोलिक पृष्ठभूमि पूरी तरह एक समान है, वहां के राजनीतिक परिदृश्य में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला है। इस अप्रत्याशित परिणाम को लेकर अब जनता के बीच एक गंभीर बहस छिड़ गई है कि क्या इस बड़े अंतर की मुख्य वजह चुनाव का माध्यम (ईवीएम बनाम बैलेट पेपर) है?
​यह प्रैस नोट मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राजबीर सिंह भारतीय (समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त सुपरिंटेंडेंट, एडवोकेट जनरल कार्यालय, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट) द्वारा जनभावनाओं को आवाज देने और लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता को बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
​चुनावी नतीजों का तुलनात्मक विश्लेषण: कहाँ क्या हुआ?
​हरियाणा और पंजाब नगर निकाय चुनाव के अंतर को स्पष्ट, तरतीब वार और पढ़ने में आसान बनाने के लिए मुख्य बिंदुओं के अनुसार नीचे व्यवस्थित किया गया है:
​1. वोटिंग का माध्यम (Voting Mode):
​हरियाणा: यहाँ चुनाव पूरी तरह ईवीएम (EVM) मशीन के माध्यम से कराए गए।
​पंजाब: यहाँ चुनाव पारंपरिक बैलेट पेपर (पर्ची द्वारा) से कराए गए।
​2. चुनावी नतीजे (Election Results):
​हरियाणा: यहाँ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एकतरफा और प्रचंड जीत हुई।
​पंजाब: यहाँ सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपना दबदबा बनाया और 50% से अधिक सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज की।
​3. विपक्ष की स्थिति (Position of Opposition):
​हरियाणा: मुख्य विपक्षी दल और अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतें इस चुनाव में बेहद कमजोर नजर आईं।
​पंजाब: यहाँ विपक्ष बिखरा नहीं बल्कि मजबूत दिखना; कांग्रेस और अकाली दल ने कई वार्डों में सत्ताधारी दल को कड़ी टक्कर दी और अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
​4. जमानत जब्त का रिकॉर्ड (Security Deposit Forfeiture):
​हरियाणा: भाजपा का प्रदर्शन इतना मजबूत रहा कि उसके अधिकांश उम्मीदवार भारी मतों से जीतकर सुरक्षित रहे।
​पंजाब: यहाँ नतीजों ने चौंकाया; खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताने वाली भाजपा (BJP) के 1100 से अधिक उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
​जनता-जनार्दन पूछती है तीखे सवाल: “आखिर ऐसे कैसे हो गया?”
​वरिष्ठ समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने प्रैस नोट के माध्यम से जनता के मन में सुलग रहे उन सवालों को प्रमुखता से उठाते हुए शब्दों में पिरोया है, जिन्हें पूछने से आज मुख्यधारा का मीडिया भी कतरा रहा है:
​”जब पंजाब और हरियाणा के लोगों के खेत के साथ खेत और घर के साथ घर लगते हैं, दोनों राज्यों का खान-पान, रहन-सहन, बोली-भाषा, सुख-दुख और राजनीतिक चेतना एक जैसी है, तो फिर चुनावी नतीजों में ऐसा अभूतपूर्व और अकल्पनीय विरोधाभास कैसे संभव है? जहां ईवीएम से बटन दबाए गए (हरियाणा), वहां भाजपा क्लीन स्वीप कर गई और जहां पारंपरिक बैलेट पेपर पर मुहर लगाई गई या पर्चियां डाली गईं (पंजाब), वहां विपक्ष भी सीना ताने मजबूत खड़ा रहा और भाजपा की ऐतिहासिक दुर्गति हुई। क्या यह महज एक इत्तेफाक है या फिर मशीन और कागज़ के बीच का वो अंतर है, जिसे जनता अब अच्छी तरह समझने लगी है? जनता पूछती है कि अगर जनता का मूड एक जैसा था, तो माध्यम बदलते ही जनादेश का चेहरा क्यों बदल गया? इस विरोधाभास ने देश की जागरूक जनता के मन में यह आशंका पैदा कर दी है कि कहीं इस उलटफेर का असली कारण ईवीएम और बैलेट पेपर का फर्क तो नहीं है?”
​जनता-जनार्दन के 3 सीधे सवाल चुनाव आयोग के नाम:
मशीन पर भरोसा क्यों थोपा जा रहा है? जब दुनिया के सबसे विकसित और तकनीकी रूप से समृद्ध देश (जैसे जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका का बड़ा हिस्सा) बैलेट पेपर पर वापस लौट चुके हैं, तो भारतीय मतदाताओं को एक ऐसी मशीन पर भरोसा करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है, जिसकी कोडिंग और चिप बंद कमरों में बनती है?
​2. जमानत जब्त बनाम क्लीन स्वीप का रहस्य क्या है? जो पार्टी सरहद के इस पार (पंजाब में) अपने उम्मीदवारों की जमानत तक नहीं बचा पाती, वो सरहद के ठीक उस पार (हरियाणा में) एकतरफा लहर कैसे पैदा कर देती है? क्या मतदाता की सोच राज्य की सीमा बदलते ही 180 डिग्री घूम जाती है?
​3. पारदर्शिता से डर क्यों? यदि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष है, तो चुनाव आयोग जनता के संदेह को दूर करने के लिए बैलेट पेपर से चुनाव कराने के ‘चैलेंज’ को स्वीकार क्यों नहीं करता?
​लोकतंत्र की साख बचाने के लिए आगामी चुनावों हेतु प्रमुख मांगें:
​निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव ही भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ और आत्मा हैं। यदि जनता के मन में वोटिंग मशीन (EVM) की निष्पक्षता को लेकर एक प्रतिशत भी संशय है, तो चुनाव आयोग और प्रशासन की यह नैतिक, संवैधानिक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी बनती है कि वे उस संशय को जड़ से मिटाएं। इसी संदर्भ में राजबीर सिंह भारतीय ने मनीमाजरा के नागरिकों और प्रबुद्ध समाज की तरफ से निम्नलिखित प्रस्ताव और मांगें रखी हैं:
चंडीगढ़ निगम चुनाव (दिसंबर 2026): चंडीगढ़ में आगामी दिसंबर 2026 में नगर निगम (कार्पोरेशन) के चुनाव होने तय हैं। इस चुनाव को पूरी तरह से पारंपरिक बैलेट पेपर (Ballot Paper) के माध्यम से कराया जाना चाहिए। चंडीगढ़ की जागरूक जनता चाहती है कि यहाँ की नगर सरकार चुनने में किसी मशीन का नहीं, बल्कि सीधे मतपत्रों का इस्तेमाल हो, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
​2. 2027 के विधानसभा चुनाव: आने वाले वर्ष 2027 में देश के जिन भी राज्यों में विधानसभा के आम चुनाव होने हैं, वहां प्रयोग के तौर पर या पूर्ण रूप से बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके जनता के खोए हुए भरोसे को दोबारा जीता जाए।
​3. चुनाव आयोग की साख की अग्निपरीक्षा: यदि चुनाव आयोग इन चुनावों को मतपत्रों (बैलेट पेपर) से करवाता है, तो उसकी निष्पक्षता पर उठ रहे सभी सवाल हमेशा के लिए शांत हो जाएंगे और कोई भी राजनीतिक दल या नागरिक चुनाव प्रणाली पर उंगली नहीं उठा पाएगा। यह कदम किसी पार्टी की हार या जीत का नहीं, बल्कि भारत के हर एक नागरिक के ‘वोट के अधिकार’ की जीत का होगा।
​निष्कर्ष
​लोकतंत्र में ‘जनता-जनार्दन’ ही सर्वोपरि और असली मालिक है। जब देश के नागरिक और मनीमाजरा के जागरूक निवासी इस व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहे हैं, तो नौकरशाहों, प्रशासन और चुनाव आयोग को अपनी जिद छोड़कर आगे आकर पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार का ‘संदेह’ लोकतंत्र को कमज़ोर करता है। चंडीगढ़ की जागरूक जनता चाहती है कि शहर के आगामी निकाय चुनाव मतपत्रों से ही कराए जाएं ताकि प्रशासन देश के सामने निष्पक्षता की एक नई मिसाल पेश कर सके।

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