माता-पिता: जीवन की सबसे बड़ी पूंजी और सच्चे मार्गदर्शक

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पुनीत महाजन :  चंडीगढ़ I 1 जून :    माता-पिता दिवस पर विशेष
लेखक: पुनीत महाजन, समाज सेवक, जनरल सेक्रेटरी कम फाउंडर भारतीय एकता मंच एवं पत्रकार…………
माता-पिता हमारे जीवन की वह अनमोल धरोहर हैं, जिनके त्याग, प्रेम, संघर्ष और संस्कारों की बदौलत हम जीवन में आगे बढ़ते हैं। संसार में यदि कोई रिश्ता निस्वार्थ प्रेम, समर्पण और सुरक्षा का प्रतीक है तो वह माता-पिता का रिश्ता है। वे अपने बच्चों की खुशियों के लिए हर कठिनाई को सहन करते हैं और स्वयं के सपनों का त्याग कर उनके भविष्य को संवारने में अपना पूरा जीवन लगा देते हैं।
हर वर्ष 1 जून को माता-पिता दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें अपने माता-पिता के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में अक्सर हम अपने माता-पिता को पर्याप्त समय नहीं दे पाते, जबकि उन्हें हमारी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। ऐसे में यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि माता-पिता का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि जीवन के हर दिन किया जाना चाहिए।
माता-पिता हमारे पहले शिक्षक होते हैं। वे हमें जीवन के मूल्यों, संस्कारों और जिम्मेदारियों का पाठ पढ़ाते हैं। उनकी सीख और अनुभव हमें सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। जब भी हम किसी कठिन परिस्थिति में होते हैं, माता-पिता का मार्गदर्शन और आशीर्वाद हमें नई शक्ति प्रदान करता है।
आज के समय में समाज का यह दायित्व बनता है कि बुजुर्ग माता-पिता को सम्मान और सुरक्षा प्रदान की जाए। परिवारों को चाहिए कि वे अपने माता-पिता के साथ समय बिताएं, उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें यह एहसास कराएं कि वे परिवार की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
माता-पिता दिवस के अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने माता-पिता का सम्मान करेंगे, उनकी सेवा करेंगे और उनके सपनों तथा उम्मीदों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता और सबसे बड़ी संपत्ति है।
आइए, इस माता-पिता दिवस पर हम अपने माता-पिता के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें तथा उनके द्वारा दिए गए संस्कारों को अपने जीवन में अपनाकर एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान दें।
“माता-पिता का सम्मान करना केवल हमारा कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारा सौभाग्य है।”

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