वीरभद्र सिंह के योगदान का किया उल्लेख, एसआईआर के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा
एएम नाथ। शिमला। भाजपा सांसद कंगना रनौत के हिमाचल प्रदेश सरकार को लेकर दिए गए बयान पर कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान नेगी ने कहा कि यदि हिमाचल प्रदेश कंगना रनौत को बोझ लगता है तो उन्हें सांसद पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कंगना के बयान के पीछे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश हो सकते हैं।
नेगी ने सवाल उठाया कि यदि प्रदेश उनके लिए बोझ है तो वह मंडी से सांसद क्यों बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते कंगना को हिमाचल के लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मंत्री ने यह भी टिप्पणी की कि मंडी के लोग अब कंगना को चुनने पर पछता रहे हैं। हालांकि, बातचीत के दौरान कंगना के उस बयान का विस्तृत संदर्भ सामने नहीं आया, जिस पर नेगी ने प्रतिक्रिया दी।
वीरभद्र सिंह के योगदान को नहीं भुलाया जा सकता
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की रोहड़ू में कथित अनदेखी से जुड़े सवाल पर नेगी ने कहा कि वीरभद्र सिंह को किसी पद की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। नेगी ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार और वीरभद्र सिंह के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के विकास में दोनों नेताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एसआईआर के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं को रोके जाने को नेगी ने ‘अघोषित इमरजेंसी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार ने दिल्ली को छावनी में बदल दिया है और वहां केंद्रीय पुलिस बलों के साथ सेना भी तैनात की गई है। नेगी ने दावा किया कि विपक्षी नेताओं और युवाओं के विरोध से घबराकर ऐसी कार्रवाई की गई। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने बातचीत के दौरान कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया।
बंगाल और बिहार चुनाव को लेकर भाजपा पर आरोप
नेगी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और बिहार में चुनावी जीत एसआईआर के जरिए हासिल की गई। उन्होंने भाजपा पर संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस दौर को ‘अमृत काल’ कहा जा रहा है, उसमें संविधान को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं।
मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि देश में इसी तरह के हालात बने रहे तो राष्ट्रीय एकता के सामने चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। उनके बयान में केंद्र सरकार की नीतियों और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच जारी राजनीतिक टकराव झलका।
