कागजी नहीं होगी हरियाली, निजी जमीन पर नहीं चलेगा मुआवजा वृक्षारोपण : हाईकोर्ट

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चंडीगढ़ : मोहाली में दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए पेड़ों की कटाई के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कम्पेन्सेटरी एफारेस्टेशन (मुआवजा वृक्षारोपण) को केवल कागजी औपचारिकता नहीं बनने दिया जाएगा और वहां बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती है, वहां उसके बदले वृक्षारोपण सार्वजनिक वन भूमि पर ही किया जाना चाहिए।

अदालत ने यह टिप्पणी पंजाब सरकार की पेड़ों की कटाई के मामले में दी गई दलीलों पर सुनवाई के दौरान की। मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच को बताया गया कि मोहाली जिले के मल्लांपुर क्षेत्र में वन भूमि पर मुआवजा वृक्षारोपण किया जाएगा। यह आश्वासन पंजाब के एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी ने अदालत को दिया।

मामला दो परियोजनाओं से जुड़ा है पहली, 13.5 एकड़ में प्रस्तावित एक विशाल माल, जो क्षेत्र के सबसे बड़े माल्स में से एक बताया गया है, और दूसरी, ट्रैफिक जाम कम करने व हादसे रोकने के उद्देश्य से बनाए जाने वाले तीन गोल चक्कर। इन दोनों के लिए पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। फिलहाल अदालत ने औपचारिक आदेश सुरक्षित रखे हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पहले मुआवजा वृक्षारोपण चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की भूमि पर प्रस्तावित था, जहां लगभग 2,600 पौधे लगाए जाने थे। हालांकि जनहित याचिकाकर्ताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की भूमि निजी है और राज्य के नियंत्रण में नहीं है। साथ ही यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय की ओर से कोई औपचारिक नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट रिकार्ड पर नहीं है।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि निजी भूमि पर लगाए गए पेड़ों की दीर्घकालिक सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। पीठ को यह भी अवगत कराया गया कि हाई कोर्ट पहले ही निजी भूमि पर कुछ श्रेणियों के पेड़ों जैसे पापलर और यूकेलिप्टस की कटाई पर लगे प्रतिबंध से छूट दे चुका है। ऐसे में यदि मुआवजा वृक्षारोपण निजी जमीन पर किया गया और बाद में वही पेड़ काट दिए गए, तो पूरे उद्देश्य पर ही पानी फिर जाएगा।

पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि मुआवजा वृक्षारोपण प्राथमिक रूप से सार्वजनिक भूमि पर ही होना चाहिए, ताकि राज्य उस पर प्रभावी नियंत्रण रख सके। इसके बाद राज्य ने निर्देश मिलने पर मल्लांपुर की वन भूमि पर पौधारोपण का भरोसा दिलाया।अदालत को यह भी बताया गया कि तीनों रोटरी के निर्माण के लिए 251 पेड़ काटे जाएंगे।

माल प्रोजेक्ट के तहत साइट पर ही 668 पेड़ लगाए जाएंगे, साथ ही आसपास के क्षेत्र में हरित क्षेत्र के रखरखाव पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त लगभग 5,000 पेड़ जिनमें अधिकांश आठ फीट ऊंचे नीम के पौधे होंगे लगाने की योजना है। पीठ ने ट्रैफिक समाधान के वैकल्पिक उपायों पर भी सवाल उठाए, जिनमें अंडरपास की संभावना शामिल है।

बताया गया कि जहां चंडीगढ़ मास्टर प्लान फ्लाईओवर की अनुमति नहीं देता, वहीं अंडरपास का परविधान करता है। वहीं मोहाली मास्टर प्लान में अंडरपास पर रोक है, हालांकि वहां पहले से ऐसे ढांचे मौजूद हैं।

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