कॉलेजों में ‘नई शिक्षा नीति’ का आगाज : छात्र अब चुन सकेंगे 3 या 4 साल की डिग्री, अधिसूचना जल्द जारी होगी

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एएम नाथ । शिमला : हिमाचलप्रदेश के कॉलेजों में जहां छात्रों की संख्या कम होगी, वहां तीन वर्षीय डिग्री और जहां संख्या अधिक होगी, वहां चार वर्षीय डिग्री कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। सहपाठ्यक्रम गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एक साझा शैक्षणिक कैलेंडर तैयार किया जाएगा, जिसे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला व सरदार पटेल विश्वविद्यालय (एसपीयू) मंडी अपनाएंगे।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्नातक पाठ्यक्रम एवं क्रेडिट फ्रेमवर्क के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयोजित कार्यशाला में यह बात कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कही।

75 विद्यार्थियों से कम नामांकन वाले कॉलेजों के विद्यार्थियों को बड़े कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए उन्हें पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। नई शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के सभी कालेजों के लिए एक जैसी नीति अपलाई जाएगी।प्रदेश के करीब 50 स्नातक महाविद्यालयों में वोकेशनल पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे और स्नातक स्तर पर विदेशी भाषाओं को भी शामिल किया जाएगा। आगामी 15 से 20 दिन में अधिसूचनाएं एवं दिशा-निर्देश तैयार कर लिए जाएंगे, जिससे नई नीति के क्रियान्वयन को समयबद्ध और व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

कुलपति ने तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए एकीकृत पोर्टल, सुरक्षित लागिन प्रणाली, यूनिक आइडी और छात्र माइग्रेशन को सरल बनाने की आवश्यकता बताई। पाठ्यक्रमों में निरंतर नवाचार करते हुए नए विषय जोड़े जाएंगे। मेजर, माइनर, कोर एवं नान-कोर विषयों की संरचना को प्रभावी बनाया जाएगा।

मुख्य अतिथि शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल एक नीति नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक शैक्षणिक परिवर्तन की प्रक्रिया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू किया जा रहा है।

क्रेडिट आधारित प्रणाली से विद्यार्थियों को होगा लाभ : क्रेडिट आधारित प्रणाली से विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा, अब वे अपनी रुचि के अनुसार विषयों का चयन कर सकेंगे। विज्ञान का विद्यार्थी संगीत पढ़ सकता है और संगीत का विद्यार्थी भौतिकी, जिससे विषयों के बीच की दीवारें समाप्त होंगी और ज्ञान का समग्र विकास होगा।

अब शिक्षकों को अध्यापन के साथ परीक्षा मूल्यांकन भी करना होगा। जिस शिक्षक द्वारा पढ़ाया जाएगा, वही मूल्यांकन भी करेगा, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। तकनीक के उपयोग पर जोर देते हुए एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसमें सुरक्षित लागिन व्यवस्था होगी और केवल अधिकृत व्यक्ति ही जानकारी तक पहुंच सकेंगे।

साथ ही छात्रों के लिए यूनिक आइडी प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे माइग्रेशन और शैक्षणिक रिकार्ड को सरल बनाया जा सके। कार्यक्रम में डीन आफ स्टडीज प्रो. बीके शिवराम, परीक्षा नियंत्रक प्रो. एसएल कौशल, अतिरिक्त सचिव शिक्षा डा. हरीश कुमार, संयुक्त निदेशक डा. सुनीता सिंह व अन्य मौजूद रहे।

 

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