गुप्त नवरात्र के दौरान मां ज्वाला का मनाया जा रहा प्रकटोत्सव : मंदिर को 100 क्वींटल फूलों से गया सजाया

by

एएम नाथ। ज्वालामुखी : विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में आषाढ़ मास शुल्क पक्ष में परंपरानुसार गुप्त नवरात्र के दौरान मां ज्वाला का प्रकटोत्सव मनाया जा रहा है। मां ज्वाला के प्रकटोत्सव के पावन दिवस पर मंदिर को 100 क्वींटल फूलों से सजाया गया है। रंग बिरंगी लाईटें भी लगाई गई हैं, ताकि मां ज्वाला का दरबार कि भव्यता और ज्यादा दिव्य रुप में दिखाई दे। इसके अलावा मां ज्वाला के प्रकटोत्सव पर मंदिर में मैया को विभिन्न प्रकार के 56 भोग अर्पित किए जाएंगे।

51 शक्तिपीठों में मां ज्वाला का स्थान सर्वोपरि   : हिमाचल के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर सैकड़ों वर्षो से साक्षात रुप में चमत्कारी ज्योतियों के रुप में मां ज्वाला दर्शन देती हैं। यह शक्तिपीठ अपने आप में इसलिए अनूठा है, क्योंकि यहां पर मूर्ति पूजा नहीं होती। मां ज्वाला के मंदिर में यह साक्षात ज्योति अपने ओज से वर्षोंत् से प्रकाशमान हो रही हैं। देश हो या विदेश मां ज्वाला देवी के दर्शनों के लिए वर्षों से करोड़ों श्रद्धालु इस स्थान पर आज के वैज्ञानिक युग में भी मां के चमत्कार को साक्षात देखकर नतमस्तक होते हैं। मां ज्वाला देवी के मुख्य मंदिर के गर्भ गृह में 7 अखंड ज्योतियों विराजमान है, जिन्हे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। ज्योतियों में सर्वप्रथम मां ज्वाला महाकाली के रुप में प्रकट हैं। चंडी, हिंगलाज, विध्यवासिनी,अन्नपूर्णा, महालक्ष्मी, महासरस्वती के रुप में मंदिर में यह ज्योतियां साक्षात भक्तों को दर्शन देती है। 51 शक्तिपीठों में मां ज्वाला को सर्वोपरि माना गया है।
मां ज्वाला का इतिहास : श्री ज्वालामुखी शक्तिपीठों में यही एक ऐसा शक्तिपीठ है, जहां मां के दर्शन साक्षात ज्योतियों के रुप में होतें हैं। शिव महापुराण में भी इस शक्तिपीठ का वर्णन आता है। जब भगवान शिव, माता सती के पार्थिव को पूरे ब्रहांड़ के घूमने लगे तब सती की जिव्हा इस स्थान पर गिरी थी, जिससे यहां ज्वाला ज्योति रुप में यहां दर्शन देती हैं। एक अन्य दंत कथा के अनुसार जब माता ज्वाला प्रकट हुई तब एक ग्वालो को सबसे पहले पहाडी पर ज्योति के दिव्य दर्शन हुए। राजा भूमिचंद्र ने मंदिर भवन को बनवाया था। यह भी धारणा है कि पांडव ज्वालामुखी में आए थे कांगड़ा का एक प्रचलित भजन भी इस का गवाह बनता है, पंजा पंजा पांडवां मैया तेरा भवन बनाया, अर्जुन चंवर झुलाया मेरी माता..।

बादशाह अकबर भी मां ज्वाला की परीक्षा लेने के लिए मां के दरबार में पहुंचा था। उसने ज्योतियों के बुझाने के लिए अकबर ने नहर का निर्माण करवाया, लेकिन मां के चमत्कार से ज्योतियां नहीं बुझ पाई। राजा अकबर को अंहकार के वशीभूत होकर सवा मन सोने का छत्र मंदिर में चढ़ाया था, लेकिन, मां ज्वाला ने इस छत्र को अस्वीकार कर खंडित कर दिया था। अकबर का यह छत्र आज भी मंदिर में मौजूद है। इस बाबत, नंगे नंगे पैरी माता अकबर आया, सोने दा छत्र चढ़ाया मेरी माता, भेंट प्रचलित है।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब

डीएसपी गढ़शंकर दलजीत सिंह खख का सम्मान :सपीकर संधवां व डिप्टी सपीकर रोड़ी ने शानदार सेवाओं के लिए डीएसपी खख को किया सम्मानित

गढ़शंकर : शानदार सेवाओं के लिए डीएसपी गढ़शंकर दलजीत सिंह खख को सपीकर कुलतार सिंह संधवां व डिप्टी सपीकर जय कृष्ण सिंह रोड़ी ने विशेष तौर पर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि डीएसपी दलजीत...
article-image
पंजाब

पंजाब सरकार द्वारा प्राइवेट साइलोज को मंडी बनाने का नोटिफिकेशन वापिस लेना किसानी संघर्ष की जीत : भज्जल

गढ़शंकर. 6 अप्रैल : बीते दिन पंजाब सरकार द्वारा विभिन्न निजी साइलोज से गेहूं की खरीद के लिए अधिसूचना जारी की गई, जिसका पूरे पंजाब में विभिन्न किसान संगठनों ने कड़ा विरोध किया। संयुक्त...
article-image
पंजाब

14वें  राष्ट्रीय वोटर दिवस पर सेकेंडरी स्कूल गढ़शंकर में तहसील स्तरीय समागम आयोजित 

गढ़शंकर, 25 जनवरी : आज 14वें राष्ट्रीय वोटर दिवस पर सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गढ़शंकर में तहसील स्तरीय समागम आयोजित किया गया। इस समागम में माननीय एसडीएम शिवराज सिंह बल्ल ने विशेष रूप से...
article-image
पंजाब

 जब तक केंद्र सरकार जनविरोधी कानून वापस नहीं ले लेती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा : भज्जल, मट्टू

गढ़शंकर 31 जनवरी। गांव भज्जल में सीपीआईएम ने केंद्र सरकार द्वारा पास किए बिजली एक्ट 2025 और लेबर कानूनों के खिलाफ एक विशाल मीटिंग की। जिसे पार्टी के जिला सचिव और राज्य कमेटी के...
Translate »
error: Content is protected !!