विजिलेंस जांच में 88 कनाल से अधिक सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर का मामला सामने आया, रजिस्ट्री और गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर की जांच
धर्मशाला, 6 सितंबर। धर्मशाला के घनियारा क्षेत्र में सरकारी जमीन को कथित तौर पर निजी लोगों के नाम पर दर्ज करवाने और बाद में उसे ट्रांसफर करने के मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (SV & ACB) धर्मशाला ने 42 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। विजिलेंस की जांच में करीब 88 कनाल से अधिक सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर किए जाने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी खाते में दर्ज जमीन को पहले कथित तौर पर निजी काश्तकारों के नाम इंतकाल के माध्यम से दर्ज किया गया। इसके बाद रजिस्ट्री, गिफ्ट डीड और अन्य दस्तावेजों के जरिए जमीन को अलग-अलग लोगों के नाम ट्रांसफर किया गया। कुछ मामलों में जमीन के एक से अधिक बार हस्तांतरण की बात भी जांच में सामने आई है।
धारा 104 के प्रावधानों की अनदेखी का आरोप
विजिलेंस जांच में आरोप लगाया गया है कि जमीन के हस्तांतरण के दौरान हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 104 के प्रावधानों की अनदेखी की गई।
जांच के अनुसार, सरकारी जमीन को पहले निजी व्यक्तियों के नाम इंतकाल के माध्यम से दर्ज करवाया गया और इसके बाद अलग-अलग दस्तावेजों के जरिए उसका हस्तांतरण किया गया। वर्ष 2019 और 2020 में दर्ज किए गए कई इंतकाल भी अब विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं।
तीन महालों का रिकॉर्ड जांच में शामिल
विजिलेंस के मुताबिक, घनियारा क्षेत्र के तीन महालों से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इनमें:
- चकबन घनियारा: करीब 84 कनाल, 03-24-06 हेक्टेयर
- मोहली लाहड़ा दी: करीब 3 कनाल, 00-12-32 हेक्टेयर
- तेहड़: करीब 17 मरले, 00-03-29 हेक्टेयर
शामिल हैं।
इन जमीनों के इंतकाल दर्ज होने से लेकर बाद में हुए रजिस्ट्री, गिफ्ट डीड और अन्य माध्यमों से हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया को जांच के दायरे में लिया गया है।
नेक राम को अदालत से जमानत
मामले में नामजद आरोपी नेक राम को शनिवार को अदालत से जमानत मिल गई। एसपी विजिलेंस रमन शर्मा ने जमानत की पुष्टि करते हुए बताया कि विजिलेंस थाना धर्मशाला में इस संबंध में FIR दर्ज की गई है और मामले में कुल 42 आरोपी नामजद किए गए हैं।
नेक राम के अधिवक्ता अंकुर सोनी ने भी जमानत मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश की प्रति मिलने के बाद मामले से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
रजिस्ट्री और गिफ्ट डीड की भी होगी पड़ताल
जांच में सरकारी जमीन को निजी नामों पर दर्ज किए जाने के बाद उसके आगे हुए हस्तांतरण को अहम माना जा रहा है। विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुआ और इसके बाद अलग-अलग दस्तावेजों के माध्यम से जमीन किन-किन लोगों के नाम ट्रांसफर की गई।
मामले में राजस्व रिकॉर्ड, इंतकाल, रजिस्ट्री, गिफ्ट डीड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले में कथित अनियमितताओं और प्रत्येक आरोपी की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
