चुनाव आयोग को सभी क्षेत्रों में एसआईआर कराने का कोई अधिकार नहीं; ईवीएम के माध्यम से मतदान प्रक्रिया पर जनता का भरोसा उठा, इसलिए मतदान बैलेट पेपर से कराया जाए : मनीष तिवारी

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चुनाव आयोग की नियुक्ति के लिए बनाई जाने वाली समिति में राज्यसभा में विपक्ष के नेता और देश के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाए

चुनाव आयोग को सभी क्षेत्रों में एसआईआर कराने का कोई अधिकार नहीं; ईवीएम के माध्यम से मतदान प्रक्रिया पर जनता का भरोसा उठा, इसलिए मतदान बैलेट पेपर से कराया जा

चंडीगढ़/नई दिल्ली, 9 दिसंबर : चंडीगढ़ के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने आज लोकसभा में चुनाव सुधारों और स्पेशल इंसेंटिव रिविज़न (एसआईआर) पर हुई चर्चा के दौरान चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसके द्वारा चलाई जा रही एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में 98 करोड़ मतदाता व राजनीतिक दल दो बड़े भागीदार हैं और इनके बीच एक निष्पक्ष अम्पायर के रूप में चुनाव आयोग का गठन किया गया था। तिवारी ने बताया कि चुनाव सुधारों में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को वोट देने का अधिकार देना एक ऐतिहासिक कदम था, लेकिन आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने 2023 में बने कानून में सुधार की मांग की। इस कानून के अनुसार चुनाव आयोग की नियुक्ति के लिए गठित समिति में दो सदस्य सरकार से, दो विपक्ष से और एक भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल होने चाहिए, जिससे प्रक्रिया निष्पक्ष ढंग से लागू हो सके। इस समिति में राज्यसभा के विपक्ष के नेता और देश के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करना आवश्यक है।

एसआईआर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देशभर में इस पर चर्चा चल रही है, लेकिन चुनाव आयोग के पास इसे सभी क्षेत्रों में लागू करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट–1950 की धारा 21 के अनुसार आयोग केवल किसी एक विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर कर सकता है, पूरे राज्य या देश में नहीं।

इसका मतलब है कि कानून में एसआईआर का व्यापक प्रावधान ही नहीं है। आयोग केवल उन मतदाताओं की प्रविष्टियों को सुधार सकता है, जिनमें कोई त्रुटि पाई गई हो। ऐसे में पूरे बिहार, केरल या बंगाल में एसआईआर करवाना कानून की भावना के अनुरूप नहीं है। यदि एसआईआर करवाना है, तो सरकार को बताना चाहिए कि किस क्षेत्र में क्या-क्या कमियां मिली हैं और इसे सदन में पेश किया जाना चाहिए। इस विषय पर अदालत में भी चर्चा होनी चाहिए।

ईवीएम के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र भरोसे पर चलता है। लोग गर्मी, धूप और बारिश में लाइन में लगकर वोट डालने आते हैं, इसलिए उन्हें विश्वास होना चाहिए कि उनका वोट सही जगह जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग चिंतित हैं कि ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती है। जब लोकतंत्र से भरोसा उठता है, तो अराजकता फैलती है।

तिवारी ने कहा कि वह पहले भी पूछ चुके हैं कि ईवीएम का सोर्स कोड किसके पास है, कंपनी के पास या चुनाव आयोग के पास, लेकिन इस पर कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने दोबारा पूछा कि इसका सोर्स कोड या मदरबोर्ड प्रोग्राम किसके नियंत्रण में है।

उन्होंने चुनावों को फिर से बैलेट पेपर से करवाने की जोरदार मांग की। उन्होंने कहा कि जनता में ईवीएम को लेकर संदेह है। या फिर सभी वोटों की गिनती वीवीपेट से होनी चाहिए। चाहे इसमें 2–3 दिन क्यों न लग जाएँ, लेकिन इससे जनता का भरोसा वापस आएगा। कई देश वापस बैलेट पेपर पद्धति अपना चुके हैं। यदि सुधार किए जाएँगे, तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी।

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