बिलासपुर 05 मार्च : जिला बिलासपुर में जनगणना-2027 के प्रथम चरण ‘गृह सूचीकरण कार्य’ के सफल संचालन के लिए तीन दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ डीआरडीए सभागार में निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी हिमाचल प्रदेश दीपशिखा शर्मा ने किया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत जनगणना कार्य निदेशालय के सौजन्य से आयोजित किया जा रहा है। प्रतिभागियों को जनगणना-2027 के प्रथम चरण को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपायुक्त एवं मुख्य जनगणना अधिकारी राहुल कुमार भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर दीपशिखा शर्मा ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्देश्य जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गृह सूचीकरण की प्रक्रिया, डिजिटल माध्यमों तथा नवीन तकनीकों के उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को जनगणना कार्य से संबंधित विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों जैसे सीएमएमएस पोर्टल, एचएलओ (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन) तथा एचएलबीसी ऐप के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि इन माध्यमों के जरिए वास्तविक समय में फील्ड डेटा संग्रह, निगरानी तथा गांवों की सीमाओं एवं पर्यवेक्षण क्षेत्रों के निर्धारण की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण सांख्यिकीय प्रक्रिया है। इसके माध्यम से प्राप्त आंकड़े सरकार की विभिन्न योजनाओं के निर्माण तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी उद्देश्य से “जनगणना से जन कल्याण” का संदेश भी दिया गया।
उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त सूचनाएं देशवासियों के लाभ के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को बनाने के लिए आवश्यक आधारभूत जानकारी प्रदान करती हैं। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर संसद एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों, पंचायतों तथा अन्य स्थानीय निकायों की सीटों का परिसीमन किया जाता है। इस प्रकार प्रगणक केवल जानकारी एकत्र नहीं करते, बल्कि वह एक विशाल राष्ट्र-निर्माण गतिविधि का अभिन्न अंग होते हैं।
इस अवसर पर उपायुक्त एवं मुख्य जनगणना अधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि जनगणना के दौरान लोगों से 34 प्रश्न पूछे जाएंगे। उन्होंने कहा कि सही डेटा सुनिश्चित करने के लिए एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर की प्रशिक्षण प्रक्रिया अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उन्होंने जानकारी के आदान-प्रदान के लिए एक व्हाट्सएप समूह बनाने के भी निर्देश दिए।
इस दौरान सहायक निदेशक जनगणना अनिल कुमार ने बताया कि चरण-1 अर्थात मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना अत्यंत उपयोगी है। इससे मानव बस्तियों की स्थिति, आवासीय कमी तथा आवासीय आवश्यकताओं से संबंधित व्यापक आंकड़े प्राप्त होते हैं, जो आवास नीतियों के निर्माण में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त यह परिवारों में उपलब्ध सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध कराता है, जिसकी आवश्यकता केंद्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों तथा अन्य गैर-सरकारी एजेंसियों को विकास एवं योजना निर्माण के लिए होती है।
उन्होंने बताया कि जनगणना का दूसरा चरण जनसंख्या गणना के रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के प्रत्येक व्यक्ति के संबंध में एक निश्चित समय बिंदु पर महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र की जाएगी। यह आंकड़े नीतियों एवं कार्यक्रमों के निर्माण, प्रभावी सार्वजनिक प्रशासन तथा विद्वानों, व्यवसायियों, उद्योगपतियों, योजनाकारों और निर्वाचन प्राधिकरणों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त ओमकांत ठाकुर, सांख्यिकी अन्वेषक अधिकारी ग्रेड-2 आनंद सोनी, कपिल, जिला के एसडीएम, जिला राजस्व अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार (योजना) तथा नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
