जीरकपुर में नकली दवाइयों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब :एक फैक्ट्री सील, दूसरी जांच के घेरे में

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सम्पन गोडाउन एरिया के ट्रोल और फूड सेफ्टी विभाग की संयुक्त कार्रवाई

एएम नाथ। चंडीगढ़ : जीरकपुर के पभात स्थित गोडाउन एरिया में पुलिस, ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट और फूड सेफ्टी विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली दवाइयां बनाने वाले एक संगठित नेटवर्क का पदार्फाश किया है। इस दौरान दो फार्मा फैक्ट्रियों पर छापेमारी की गई, जिनमें से एक फैक्ट्री को मौके पर ही सील कर दिया गया, जबकि दूसरी फैक्ट्री से दवाइयों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। संयुक्त छापेमारी के दौरान जब अधिकारियों ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया तो मौके पर चौकाने वाली स्थिति सामने आई। जांच में पाया गया कि बीमार होने पर आम लोग जिन गोलियों का सेवन करते हैं, वहीं दवाइयां अत्यंत गंदे और अस्वच्छ हालात में तैयार की जा रही थीं। फैक्ट्री परिसर में साफ-सफाई का पूरी तरह अभाव था और दवाइयों के निर्माण में मानकों की खुली अनदेखी की जा रही थी। फर्श पर गंदगी फैली हुई थी, कच्चा माल खुले में रखा गया था और दवा निर्माण के लिए उपयोग होने वाली मशीनों की हालत भी बेहद खराब पाई गई। अधिकारियों के अनुसार ऐसे हालात में तैयार की जा रही दवाइयां लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
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रेनोस्ट केयर फार्मा पर गंभीर अनियमितताएं

छापेमारी के दौरान रेनोस्ट केयर फार्मा नामक फैक्ट्री में गंभीर अनियमितताएं सामने आई। फैक्ट्री के बाहर न तो कोई साइन बोर्ड लगा हुआ था जिस पर कोई लाइसेंस न हो या कंपनी का रजिस्ट्रेशन न और न ही संचालक किसी भी प्रकार का वैच लाइसेंस या दस्तावेज संबंधित विभागों को दिखा पाए। जाव के दौरान पाया गया कि फैक्ट्री में टैबलेट, इंजेक्शन, प्रोटीन पाउडर सप्लीमेंट, कफ सिरप, पेडियाट्रिक दवाइयां और अन्य मेडिकल उत्पाद संदिग्ध तरीके से तैयार किए जा रहे थे। इन हालातों को देखते हुए हुग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने फैक्ट्री को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया।
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गुप्त सूचना के आधार पर की गई संयुक्त रेड

पुलिस को पिछले कई दिनों से लगातार इनपुट मिल रहे थे कि प्रभात के गोडाउन एरिया में बड़े स्तर पर नकली दवाइयों का निर्माण किया जा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस ने ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट और फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों को साथ लेकर देर रात छापेमारी की।
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वातावे हेल्थकेयर फार्मा से लिए गए सैंपल

वहीं दूसरी फैक्ट्री वाताये हेल्थकेयर फार्मा की भी गहन जांच की गई। यहां से करीब 20 अलग-अलग दवाइयों और मेडिकल उत्पादों के सैंपल कब्जे में लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से स्टैंप पैड और अन्य सामग्री भी बरामद की गई, जिनका इस्तेमाल दवड़यों की पैकिंग पर मैन्युफैकरिंग डेट, एक्सपायरी डेट. बैच नंबर और एमआरपी खुद ही छापने के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा आयोडेक्स और मूव जैसे पेन रिलीफ बाम, कफ सिरप और अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे थे, जिन पर अपने लेबल लगाकर बाजार में बेचा जा रहा था।
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देशभर में सप्लाई का दावा

स्थानीय लोगों का कहना है कि ये फैक्ट्री करीब पांच साल से संचालित हो रही थी और इनकी सप्लाई केवल पंजाब या ट्राई-सिटी तक सीमित नहीं थी, बल्कि देश के कई राज्यों में इनकी दवाइयां भेजी जाती थीं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला देशभर में लोगों की सेहत के साथ बड़े स्तर पर खिलवाड़ का बनता है। मौके पर मौजूद फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारी रवि गोयल ने बताया कि वातावे हेल्थकेयर फार्मा पर पहले भी करीब 16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। यदि दोबारा नकली दवाइयां बनाते हुए पाया गया, तो इस बार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. ज्योति बब्बर ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की गई है। कई बिंदुओं पर गंभीर संदेह पाए गए हैं, जिसके चलते एक कंपनी को सील किया गया है, जबकि दूसरी कंपनी के सैंपल लिए गए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार इन कंपनियों के लाइसेंस भी स्पष्ट रूप से वैव नहीं पाए गए हैं। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं एएसपी गजलप्रीत कौर ने बताया कि पुलिस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि जीरकपुर के प्रभात क्षेत्र में नकली दवाइयों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। जांच के बाद आरोप सही पाए गए, जिसके चलते संबंधित विभागों के साथ मिलकर सख्त कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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