MMSY ऋण और सब्सिडी मामले में फिर उठे सवाल, अधिकारियों की भूमिका जांचने की मांग
चार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, अधिवक्ता ने NABARD से मांगा स्पीकिंग ऑर्डर
एएम नाथ। सोलन : जोगिंद्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक (JCCB) में कथित MMSY ऋण अनियमितताओं को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने NABARD के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO), मुंबई को चौथी शिकायत भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि इससे पहले 29 जून, 3 अगस्त और 5 सितंबर 2025 को भी विस्तृत शिकायतें भेजी गई थीं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायत के अनुसार मामला ₹79.50 लाख के दो MMSY ऋणों तथा लगभग ₹21.87 लाख की सब्सिडी से जुड़ा है। अधिवक्ता शर्मा का आरोप है कि ऋण स्वीकृति और सब्सिडी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं तथा नियमों का उल्लंघन हुआ, जिसके कारण सब्सिडी का मामला वर्षों से लंबित है। उन्होंने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल संभव होगी।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2020-21 की चार्टर्ड अकाउंटेंट की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य दर्ज होने के बावजूद मामले पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा 1 नवंबर 2021 की आंतरिक जांच रिपोर्ट में भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख होने के बावजूद यह जांच नहीं की गई कि दोनों ऋण वास्तव में एक ही परियोजना से जुड़े थे या नहीं।
अधिवक्ता ने शिकायत में गुरमीत सिंह (रिकवरी एवं लॉ सेक्शन), तत्कालीन प्रबंध निदेशक ताशी सांडुप, राम पॉल (एजीएम) तथा रूप सिंह (तत्कालीन एजीएम, लोन) की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने NABARD से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर पूरे मामले में दो सप्ताह के भीतर कारणयुक्त लिखित निर्णय (स्पीकिंग ऑर्डर) जारी करने का अनुरोध किया है।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि निर्धारित समय में इस मामले में आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो वे उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाएंगे। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारियों अथवा जोगिंद्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
