जोगिन्द्रा बैंक में कथित एनपीए अनियमितताओं की जांच की मांग, अधिवक्ता मुकेश शर्मा ने नाबार्ड को भेजी शिकायत

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अर्की-दाड़लाघाट शाखाओं के एनपीए मामलों पर उठे सवाल, नाबार्ड से निष्पक्ष विजिलेंस जांच की मांग

जोगिन्द्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अधिकारियों पर आरोप, फोरेंसिक ऑडिट और रिकॉर्ड जांच की मांगएएम नाथ। चंडीगढ़/सोलन :  पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने जोगिन्द्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (जेसीसीबी), सोलन से जुड़े कथित एनपीए मामलों को लेकर नाबार्ड के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ), मुंबई को शिकायत भेजकर स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है। शिकायत में बैंक के कुछ अधिकारियों पर कथित वित्तीय अनियमितताओं, ऋण खातों में लापरवाही और बैंकिंग प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
अधिवक्ता शर्मा ने शिकायत में आरोप लगाया है कि बैंक की कुछ शाखाओं में वर्षों से एनपीए ऋण खातों की प्रभावी वसूली नहीं की गई और कथित रूप से फर्जी या संदिग्ध एनपीए खातों को छिपाने का प्रयास किया गया। उन्होंने राम पॉल (एजीएम), मदन गोपाल (ब्रांच मैनेजर, अर्की) और सचिन पाल (ब्रांच मैनेजर, दाड़लाघाट) सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
शिकायत में 26 सितंबर 2017 की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि कथित अनियमितताओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसमें दावा किया गया है कि अर्की, सेवड़ा चंडी और दाड़लाघाट शाखाओं का एनपीए बैंक के कुल एनपीए का बड़ा हिस्सा है, जिससे बैंक को आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई गई है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि लंबित शिकायतों और विवादों के बावजूद कुछ अधिकारियों को पदोन्नति एवं सेवा लाभ दिए गए। इसके अलावा कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) और “सस्पेंस इंटरेस्ट” मॉड्यूल के संचालन से जुड़े मुद्दों की जांच की मांग भी की गई है।
अधिवक्ता शर्मा ने नाबार्ड से संबंधित ऋण खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने, बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि यदि जांच में प्रथम दृष्टया अपराध सामने आता है तो मामला सक्षम जांच एजेंसी को सौंपा जाए।
शिकायत की प्रतियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित अन्य अधिकारियों को भेजे जाने की बात भी कही गई है।

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