निशा रानी प्रकरण में दस्तावेज छिपाने और मिलीभगत के आरोप
नाबार्ड से निष्पक्ष जांच की मांग, सहकारी तंत्र पर उठे सवाल
एएम नाथ। सोलन : जोगिन्द्रा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक (JCCB) सोलन और रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज (RCS) शिमला के खिलाफ एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें संस्थागत मिलीभगत, साक्ष्य छिपाने और पद के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए गए हैं। यह मामला बैंक की कर्मचारी निशा रानी से जुड़ा है, जिनकी ओर से अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने नाबार्ड (NABARD) के मुख्य सतर्कता अधिकारी को विस्तृत शिकायत भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, बैंक प्रबंधन ने 20 अगस्त 2025 और 12 नवंबर 2025 को जिला मजिस्ट्रेट सोलन को पत्र भेजकर निशा रानी के ओबीसी प्रमाणपत्र की जांच शुरू करवाई। यह कार्रवाई एक कथित शिकायत के आधार पर की गई, लेकिन संबंधित शिकायत की प्रति कर्मचारी को उपलब्ध नहीं करवाई गई। अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा का कहना है कि यह “Audi Alteram Partem” जैसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है और पूरी प्रक्रिया को संदेहास्पद बनाता है।
बताया गया कि निशा रानी ने 19 दिसंबर 2025 को बैंक प्रबंधन से संबंधित सभी दस्तावेजों, पत्रों और शिकायत की प्रमाणित प्रतियां मांगीं, साथ ही समान श्रेणी के अन्य कर्मचारियों का विवरण भी मांगा। हालांकि, बैंक की ओर से इस आवेदन पर कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने 6 जनवरी 2026 को RCS शिमला में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अधिवक्ता शर्मा का आरोप है कि नियामक संस्था की चुप्पी इस पूरे मामले में उसकी भूमिका पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आशंका जताई कि जिस शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू हुई, वह मनगढ़ंत हो सकती है या बाद में तैयार की गई हो, इसी कारण उसे छिपाया जा रहा है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बैंक अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निशा रानी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा। वहीं, अन्य अधिकारियों को नियमों की अनदेखी कर पदोन्नति और लाभ दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
अधिवक्ता मुकेश कुमार शर्मा ने NABARD से मांग की है कि इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवाई जाए, सभी रिकॉर्ड जब्त किए जाएं ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो, और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है और सहकारी बैंकिंग तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला न केवल जोगिन्द्रा बैंक बल्कि पूरे प्रदेश के सहकारी ढांचे के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
