अमृतसर : अमृतसर में सचखंड श्री हरिमंदर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघुबीर सिंह को पद से हटाए जाने के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के वरिष्ठ नेता करनैल सिंह पीर मोहम्मद ने इस फैसले पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध जताया है।
उन्होंने जारी बयान में कहा कि मुख्य ग्रंथी जैसे सर्वोच्च धार्मिक पद से अचानक हटाना पंथक मर्यादा और परंपराओं के खिलाफ है। यह फैसला सियासी इच्छाओं से प्रेरित और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि 72 घंटे का नोटिस महज एक औपचारिकता है, जबकि हटाने का निर्णय पहले ही “लिफाफे” के जरिए तय किया जा चुका था। करनैल सिंह पीर मोहम्मद ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधन ढांचे पर काबिज सियासी धड़ों की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक संस्थाओं में लगातार राजनीतिक हस्तक्षेप से सिख संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि दरबार साहिब जैसे पवित्र स्थान के अहम पदों पर बार-बार बदलाव संस्था की स्थिरता और स्वतंत्र पहचान को कमजोर करता है।
उन्होंने ज्ञानी रघुबीर सिंह की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनकी शख्सियत और पंथक योगदान निर्विवाद हैं। बिना ठोस कारण के उन्हें हटाना देश-विदेश में रह रही संगत की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
उन्होंने एसजीपीसी पदाधिकारियों से अपील की कि ऐसे फैसले लेते समय निजी या सियासी हितों की बजाय पंथक भावनाओं और योग्यता को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही चेतावनी दी कि धार्मिक मामलों में राजनीतिक दखल से कौम में अविश्वास बढ़ेगा, जिसका असर भविष्य में देखने को मिलेगा।
