IAS अधिकारी से मुख्यमंत्री तक का सफर, कांग्रेस से बगावत कर बनाई अपनी पार्टी
रायपुर। छत्तीसगढ़ 1 नवंबर को अपना 26वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस अवसर पर राज्य में तीन दिवसीय राज्योत्सव की शुरुआत हुई। मध्यप्रदेश से अलग होकर 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था। राज्य के पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस नेता अजीत जोगी बने थे। प्रशासनिक अधिकारी से राजनीति में आए जोगी का सफर काफी दिलचस्प रहा। राजीव गांधी के एक फोन कॉल ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी थी।
गौरेला में जन्म, इंजीनियरिंग के बाद बने IAS
अजीत जोगी का जन्म छत्तीसगढ़ के गौरेला में हुआ था। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे जोगी ने इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में काम किया। प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाई। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सुझाव और बाद में राजीव गांधी के आग्रह पर उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
राजीव गांधी के फोन से बदली जिंदगी
अजीत जोगी जब इंदौर जिले के कलेक्टर थे, उस समय उन्हें प्रधानमंत्री राजीव गांधी की ओर से राजनीति में आने का प्रस्ताव मिला था। जोगी ने अपने राजनीतिक जीवन से जुड़े एक किस्से में बताया था कि एक दिन ग्रामीण क्षेत्र के दौरे से लौटने पर उनकी पत्नी ने उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आने की जानकारी दी।
रात करीब 9:30 बजे उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में संपर्क किया। वहां राजीव गांधी के तत्कालीन निजी सहायक वी. जॉर्ज ने बताया कि प्रधानमंत्री सुबह से उनसे बात करने की कोशिश कर रहे थे। राजीव गांधी चाहते थे कि जोगी कलेक्टर पद से इस्तीफा देकर राजनीति में आएं।
राज्यसभा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
राजीव गांधी के निर्देश पर अजीत जोगी ने कलेक्टर पद से इस्तीफा दिया और मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए नामांकन किया। उन्हें कांग्रेस की राष्ट्रीय टीम में जगह मिली। वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी बने। इसके बाद रायगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। गांधी परिवार के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती थी।
1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के गठन के बाद अजीत जोगी को राज्य का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया। इस तरह एक प्रशासनिक अधिकारी ने नवगठित राज्य की पहली सरकार का नेतृत्व किया।
झीरम घाटी हमले को लेकर भी विवादों में रहे
25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित 30 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। अजीत जोगी उस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे, लेकिन वे रैली के काफिले के साथ बस्तर नहीं गए थे।
इस घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर जोगी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए। हालांकि, किसी आरोप को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस से अलग होकर बनाई अपनी पार्टी
समय के साथ अजीत जोगी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ते गए। आखिरकार उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) बनाई। हालांकि, पार्टी को राज्य की राजनीति में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
अजीत जोगी का 29 मई 2020 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके राजनीतिक जीवन में प्रशासनिक अनुभव, कांग्रेस में प्रभावशाली भूमिका, मुख्यमंत्री पद और बाद में पार्टी से अलग होने जैसे कई महत्वपूर्ण पड़ाव रहे।
