मुंबई। वैवाहिक विवाद में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद मुंबई के एक पूर्व एयरफोर्स अधिकारी को आखिरकार राहत मिली है। फैमिली कोर्ट ने पति की काउंटर-क्लेम याचिका स्वीकार करते हुए क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद का आदेश दिया। यह कानूनी लड़ाई 12 साल, 6 महीने और 19 दिन तक चली। दोनों की शादी दिसंबर 1997 में मुंबई में हुई थी और उनकी एक बेटी भी है।
चरित्र और शराब की लत के आरोप बने विवाद की वजह
पति की ओर से अदालत में दलील दी गई कि पत्नी ने बिना ठोस सबूत के उसके अवैध संबंधों और शराब की लत को लेकर गंभीर आरोप लगाए। अदालत ने माना कि जीवनसाथी के चरित्र पर निराधार आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है।
मामले में यह भी सामने आया कि पति के बयानों पर पत्नी की ओर से क्रॉस-एग्जामिनेशन नहीं किया गया, जिससे पति के दावों को मजबूती मिली।
घरेलू हिंसा के आरोपों से बढ़ा विवाद
वर्ष 2014 की शुरुआत में पत्नी, जो पेशे से वकील हैं, ने घरेलू हिंसा कानून के तहत पति पर शारीरिक, यौन और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। वहीं, पति ने आरोप लगाया कि पत्नी उसकी आधिकारिक यात्राओं के दौरान उस पर शक करती थीं, सार्वजनिक रूप से अपमानित करती थीं और एयरफोर्स की नौकरी छोड़कर निजी क्षेत्र में काम करने का दबाव बनाती थीं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पत्नी के पिता की ओर से लगाए गए आरोपों को भी सुनी-सुनाई बातों पर आधारित पाया। उनके पास आरोपों के संबंध में प्रत्यक्ष जानकारी नहीं थी।
कांदिवली फ्लैट में रहने का अधिकार मिला
फैमिली कोर्ट ने तलाक के आदेश के साथ संपत्ति से जुड़े निर्देश भी जारी किए। अदालत ने पूर्व एयरफोर्स अधिकारी को कांदिवली स्थित फ्लैट में रहने का अधिकार दिया। साथ ही पत्नी को कांदिवली और सांताक्रूज स्थित दोनों फ्लैटों के मूल संपत्ति दस्तावेज वापस करने का निर्देश दिया।
इस फैसले से वैवाहिक विवादों में निराधार आरोपों और मानसिक क्रूरता के कानूनी पहलुओं पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
