एएम नाथ। धर्मशाला : तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। 68वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कार समारोह में 90 साल की उम्र में दलाई लामा को अपने एल्बम के लिए बेस्ट ऑडियो बुक, नैरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग के लिए यह अवॉर्ड प्रदान किया गया है। उनके एल्बम ‘मेडिटेशन: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा’ को इस खास कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया था जहां उन्हें उनका पहला ग्रैमी अवॉर्ड मिला है। इसके साथ ही, वह के-पॉप और स्टीवन स्पीलबर्ग के साथ पहली बार अवॉर्ड जीतने वालों की लिस्ट में शामिल हो गए।
इस सम्मान को स्वीकार करते हुए दलाई लामा ने कहा कि यह अवॉर्ड उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि दुनिया में शांति और करुणा के संदेश का सम्मान है। उन्होंने इसे कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार किया, और इसे किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के तौर पर नहीं देखा। यह हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की पहचान है। दुनिया के सभी 8 अरब लोगों की सामूहिक भलाई के लिए शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और ‘मानवता की एकता’ की समझ होना बेहद जरूरी है। धर्मगुरु ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की कि ग्रैमी जैसा मंच इन विचारों और संदेशों को दुनिया भर में और अधिक व्यापक रूप से फैलाने में सहायक होगा।
——————-
करुणा और आपसी सद्भाव के वैश्विक प्रतीक हैं दलाई लामा
दलाई लामा सिर्फ एक धार्मिक गुरु ही नहीं हैं, बल्कि वे शांति, अहिंसा, करुणा और आपसी सद्भाव के वैश्विक प्रतीक भी हैं। साल 1989 में उन्हें तिब्बत के मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने और अहिंसा का संदेश फैलाने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह बहुत बड़ा सम्मान है।
