तेंदुए की खाल बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, कई राज्यों में फैला था धंधा…. CBI करेगी अब जांच

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एएम नाथ। चंडीगढ़। पिछले साल सेक्टर-22, चंडीगढ़ में वन्यजीव तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया था। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटीलेंस की टीम ने सेक्टर-22 की सूद धर्मशाला से दो तस्करों को पकड़ा था जिनसे तेंदुए की खाल बरामद हुई थी।

यह दोनों वन्यजीवों की तस्करी के एक बड़े गिरोह से जुड़े थे। इसी गिरोह का पर्दाफाश करने और गहनता से जांच के लिए मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है।  चंडीगढ़ वन विभाग की मांग पर इस मामले की जांच दिल्ली सीबीआई कर रही है। दिल्ली साबीआई ने इस संबंध में दो आरोपितों विक्रम सिंह बघेल और अवधेश चौधरी के खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 9, 39, 40, 48, 49बी, 50, 51 और 57 के तहत एफआइआर दर्ज कर ली है।

यह मामला चंडीगढ़ से जुड़ा है तो इसकी चार्जशीट भी चंडीगढ़ सीबीआई की विशेष अदालत में ही दाखिल की जाएगी। सितंबर 2025 में डायरेक्टोरेट आफ रेवेन्यू इंटीलेंस (डीआरआइ) और मुंबई कस्टम को चंडीगढ़ में तेंदुए की खाल की तस्करी के बारे में सूचना मिली थी। डीआरआइ की चंडीगढ़ यूनिट के साथ यहां एक जाइंट ऑपरेशन चलाया गया। टीम को पता चला कि आरोपित सूद धर्मशाला में ठहरे हुए थे। डीआरआइ की टीम ने ग्राहक बनकर उनसे बातचीत की। जिसके बाद छापा मारकर दो तस्करों विक्रम और अवधेश को दबोच लिया गया था। यह दोनों राजस्थान के रहने वाले हैं। जांच के दौरान पता चला कि यह तेंदुए की खाल की खरीद-फरोख्त करते हैं। यह देश के कई हिस्सों में इसे सप्लाई करते थे।

अंतरराज्यीय नेटवर्क का हो सकता पर्दाफाश :  डीआरआइ ने आरोपितों को पकड़ने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए इस केस को चंडीगढ़ वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट को भेज दिया। चंडीगढ़ वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट ने केस दिल्ली सीबीआइ को ट्रांसफर कर दिया। अब जांच
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, तेंदुए की खाल हिमाचल प्रदेश के किन इलाकों से यहां लाई जाती है और इन्हें किन बाजारों में सप्लाई किया जाना था।

हिमाचल से लाई जाती थी खाल :  जांच के दौरान पता चला कि आरोपित तेंदुए की खाल को हिमाचल प्रदेश से लाते थे और फिर इन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई किया जाता था। आरोप के मुताबिक तेंदुए की खाल की तस्करी में इन्हें मोटी रकम मिलती थी। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित लंबे समय से संरक्षित वन्यजीव प्रजातियों की अवैध तस्करी में संलिप्त हैं।

सर्वोच्च कानूनी संरक्षित जानवर है तेंदुआ :  तेंदुए को वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 में सर्वोच्च स भित जानवरों की सूची में शामिल व्या गया है। तेंदुआ शेड्यूल- कैटेगरी में आता है। शेड्यूल-1 में शामिल किसी भी प्रजाति के जानवर को पकड़ना, मारना, उसके शरीर के हिस्सों का व्यापार करना भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाता है।

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