दिल्ली चुनाव में हार के बाद आप के सामने नई चुनौती, निगम की सत्ता बचाने को 3 सीटें जरूरी

by
दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद आम आदमी पार्टी (आप) अब नगर निगम की सत्ता बचाने की कवायद में जुट गई है। इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता रणनीति बना रहे हैं। दरअसल, विधानसभा चुनाव के बाद निगम में 10 सीटें खाली हुई हैं क्योंकि यहां के पार्षद चुनाव जीतकर विधायक बन गए हैं।
ऐसे में निगम पार्षदों के चुनाव होंगे और चुनाव परिणाम के बाद यहां के समीकरण भी बदल सकते हैं।
दिल्ली में 250 वार्ड हैं। इनमें से एक वार्ड द्वारका बी कमलजीत सहरावत के पश्चिमी दिल्ली से सांसद बनने पर खाली हो गया था। वहीं, इस विधानसभा चुनाव में कुल 17 पार्षद मैदान में उतरे थे। भाजपा के 11 पार्षदों में से 7 ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, जबकि ‘आप’ के छह पार्षदों में से तीन विधायक बन गए हैं। विधानसभा चुनाव के बाद निगम में अब 239 निगम पार्षद बचे हैं। इनमें से आप के 119 जबकि भाजपा के 113 पार्षद हैं। वहीं, कांग्रेस के कुल सात पार्षद हैं। अभी के समीकरण बताते हैं कि ‘आप’ के पास निगम में बहुमत है, लेकिन 11 पार्षदों के लिए उपचुनाव होते हैं तो उसमें समीकरण बदल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक निगम की सत्ता बचाने के लिए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को कम से कम तीन सीटें जीतनी होगी।
आप से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नगर निगम चुनाव को अभी तीन साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में खाली हुई 11 सीटों पर उपचुनाव जल्द कराया जा सकता है। ‘आप’ अब निगम में अपनी सत्ता बचाने के लिए सक्रिय हो गई है।
उपचुनाव में बदल सकते हैं समीकरण सूत्रों का कहना है कि अगर 11 खाली सीटों में उपचुनाव होते हैं तो उनमें से कम से कम तीन सीट ‘आप’ के लिए जीतना आवश्यक होगा। अगर इससे कम सीट उनकी आती है तो भाजपा निगम में उनसे अधिक सीटें हासिल कर लेगी। वहीं अभी के माहौल में कांग्रेस से निगम में ‘आप’ को समर्थन की उम्मीद भी बेहद कम है। अगर ऐसी स्थिति सदन में बनी तो भाजपा निगम की सत्ता में अपना बहुमत साबित कर वहां भी काबिज हो सकती है।
नए वित्तीय वर्ष का बजट सदन में प्रस्तुत होगा
वहीं, दिल्ली नगर निगम के नए वित्तीय वर्ष के बजट को प्रस्तुत करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस सप्ताह सदन की बैठक में बजट को आयुक्त अश्विनी कुमार प्रस्तुत करेंगे। निगम के नियम अनुसार, 15 फरवरी से पूर्व बजट को पेश करना अनिवार्य होता है। इसके मद्देनजर निगम के प्रशासनिक कार्यों में करों की अनुसूची को निर्धारित किया जाता है। इसमें यह तय करना आवश्यक होता है कि नए वित्तीय वर्ष में संपत्ति कर की वसूली में बढ़ोतरी होगी या नहीं। साथ ही, विभागों के बजट को भी तय किया जाता है। हर विभाग को अप्रैल से उनके बजट के तहत फंड जारी होता है। इस वर्ष उम्मीद की जा रही है कि संपत्ति कर वसूली में अधिक बदलाव होने की संभावना कम है। अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल के निर्देश पर बजट को प्रस्तुत करने की तैयारियां कर रहे हैं।
Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
हिमाचल प्रदेश

दिल्ली पुलिस की वैधानिक कार्रवाई में हस्तक्षेप संघीय ढांचे पर प्रहार, दोषियों को संरक्षण देना अक्षम्य : जयराम ठाकुर

राहुल-प्रियंका के इशारे पर चल रही हिमाचल सरकार, देवभूमि को बनाया राजनीतिक शरणस्थली” दिल्ली पुलिस से सीसीटीवी के डीवीआर बचाना भी इस मशक्कत का एक कारण, सारे साज़िश कर्ताओं के बेनकाब होने था था...
article-image
पंजाब

कबड्डी प्रमोटर राणा बलाचौरिया को अक्टूबर में थी मारने की प्लानिंग : कोलकाता से दबोचे शूटरों ने किया खुलासा

मोहाली। पंजाब के कबड्डी प्रमोटर कंवर दिग्विजय सिंह उर्फ राणा बलाचौरिया को अक्टूबर में ही मारने की प्लानिंग थी, लेकिन गैंगस्टर अपने मनसूबों में सफल नहीं हो सके। इसके बाद 15 दिसंबर को सोहाना...
article-image
पंजाब

The Passing Out Parade and

Hoshiarpur/Daljeet Ajnoha /Nov.16 : The Passing Out Parade and Attestation Ceremony of 622 Female Recruit Constables of Batch Nos. 268,269 & 270 was held with grandeur at the Shaheed Satpal Choudhary Parade Ground, Subsidiary Training...
article-image
पंजाब

पुलिस अधिकारियों द्वारा नशा तस्करों के खिलाफ चलाया गया सर्च ऑपरेशन

भास्कर न्यूज । गढ़शंकर । डीजीपी पंजाब के दिशा-निर्देशों के अनुसार यहां पंजाब पुलिस राज्य भर में कासो ऑपरेशन चला रही है। वहीं गढ़शंकर के गांव देनोवाल खुर्द जो नशे के लिए मशहूर है...
Translate »
error: Content is protected !!