एक दिसंबर को रामलीला मैदान से संसद व इंडिया गेट की ओर प्रस्तावित मार्च; चार श्रम संहिताओं की वापसी और 42 हजार रुपये न्यूनतम वेतन समेत कई मांगें
शिमला। श्रमिक संगठन सीटू ने एक दिसंबर को दिल्ली में होने वाले मजदूर प्रतिरोध कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश से हजारों मजदूरों को लामबंद करने का निर्णय लिया है। सीटू ने देशभर से कम से कम एक लाख वॉलंटियर्स को दिल्ली में जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
रविवार को सीटू शिमला जिला कमेटी की बैठक में कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने की, जबकि महासचिव अमित ने तैयारियों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि एक दिसंबर को देश के विभिन्न राज्यों से मजदूर लाल झंडों के साथ दिल्ली पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान से संसद और इंडिया गेट की ओर मार्च प्रस्तावित है। उन्होंने इसे मजदूर आंदोलन के संघर्ष के नए चरण की शुरुआत बताया।
बेरोजगारी और महंगाई को लेकर केंद्र पर निशाना
सीटू नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इन नीतियों के कारण देश में बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक असमानता और रोजगार की असुरक्षा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्षों के बाद मजदूरों ने जो अधिकार हासिल किए थे, उन्हें कमजोर किया जा रहा है।
सीटू ने चार श्रम संहिताओं का विरोध करते हुए कहा कि इनके लागू होने से श्रमिकों की स्थिति और अधिक असुरक्षित होगी। संगठन ने ट्रेड यूनियन गतिविधियों और हड़ताल के अधिकार को सीमित करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया।
30 नवंबर की रात तक दिल्ली पहुंचने का आह्वान
सीटू ने हिमाचल प्रदेश के मजदूरों से 30 नवंबर की रात तक दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है। संगठन के मुताबिक एक दिसंबर को सुबह करीब 10 बजे मार्च शुरू किया जाएगा। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मजदूरों को तीन दिसंबर की शाम से पहले वापसी की योजना नहीं बनाने को कहा गया है।
42 हजार न्यूनतम वेतन और 21 हजार पेंशन की मांग
सीटू की प्रमुख मांगों में चार श्रम संहिताओं को वापस लेना, 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करना तथा सभी मजदूरों के लिए 42 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और 21 हजार रुपये सार्वभौमिक न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करना शामिल है।
इसके अलावा संगठन ने रिक्त सरकारी पदों को भरने, ठेका मजदूरों को नियमित करने, समान काम के लिए समान वेतन देने, श्रमिक सुरक्षा मजबूत करने और ट्रेड यूनियन अधिकारों की रक्षा करने की मांग उठाई है।
सीटू ने जल, जंगल और जमीन पर जनता के अधिकार सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
हिमाचल में व्यापक अभियान चलाने का फैसला
सीटू ने कहा कि दिल्ली मार्च को लेकर हिमाचल प्रदेश में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, उद्योगों, निर्माण क्षेत्र, परिवहन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी, आशा वर्कर्स, आउटसोर्सिंग, ठेका श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों से संपर्क कर उन्हें दिल्ली कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लामबंद किया जाएगा।
संगठन नेताओं ने कहा कि मजदूरों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर संघर्ष को और व्यापक किया जाएगा तथा दिल्ली का एक दिसंबर का कार्यक्रम इस आंदोलन को नई दिशा देने का काम करेगा।
