धार्मिक आस्था के साथ पडियार देवता की पूजा अर्चना के साथ संपन्न हुआ जोहड़जी का दो सप्ताह तक आयोजित ऐतिहासिक मेला

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पट्टा मेहलोग (गिरधारी लाल कश्यप) : बद्दी उपमंडल के ऐतिहासिक धर्मिक स्थल जोहड़ जी साहिब गुरुद्वारा परिसर में पिछले दो सप्ताह से चल रहे धार्मिक मेले का कौड़ा राक्षस के उद्धार की कथा के साथ संपन्न हुआ। इस मेले में जिला के इलावा अन्य दूसरे राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने शीश नवा कर बैंड बाजे के साथ पावन जोहड़ जी की परिक्रमा की व रात्रि में गुरु की महिमा का गुणगान किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी हजारी लगाई। पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों से आई संगत ने अनेक स्थानों पर भंडारे लगाए तथा दरबार हाल में भजन कीर्तन किया।

ऐसी मान्यता है कि इस पवित्र स्थल को सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी की चरण छू प्राप्त है। यहाँ गुरु नानक देव जी भाई बाला और मरदाना जी के साथ यहां तप करने आए थे।
कौड़ा राक्षस का उद्धार: मान्यता यह भी है कि 15वीं शताब्दी में यहाँ कौड़ा नामक एक खूंखार राक्षस रहता था, जो स्थानीय लोगों सहित यात्रियों को पकड़कर तेल के कड़ाहे में भून कर खाता था। एक जब मरदाना जी स्थल पर विचरण कर रहे थे तो उसने उन्हें भी अपने बल से बंदी बना लिया था। यह देखकर गुरु नानक देव जी ने अपने आध्यात्मिक प्रकाश से कौड़ा का अहंकार नष्ट किया और उसका उद्धार किया, जिसके बाद वह गुरु जी का शिष्य बन गया।
मेले का समापन: मेले का समापन बैसाखी पर्व के दिन किया जाता है। कौड़ा राक्षस जिसे स्थानीय लोग पडियार देवता के नाम पूजा अर्चना करते है। मंगलवार को मेला समाप्ति पर नारियल फोड़ कर पूजा की गई। कौडा राक्षस के उद्धार की इस घटना को याद करते हुए और गुरु नानक देव जी के आशीर्वाद का स्मरण करते हुए दरबारियों द्वारा पूजा अरदास कर मेले के समापन की घोषणा की जाती है।
सांप्रदायिक एकता: श्री जोहड़ जी साहिब हिंदू-सिख एकता का प्रतीक माना जाता है। दोनों समुदाय के लोग मिलजुल कर इस मेले का आयोजन करते हैं।बिना किसी भेदभाव से संगत को भोजन व मिष्ठान परोसे जाते हैं।जिसमें प्राचीन काल से परोसा जाने वाला खीचड़ प्रमुख है।श्रद्धालु भोग स्वरूप इसे बड़े चाव से खाते है।मेले के दौरान अटूट लंगर में बाहर व स्थानीय सेवादारों ने निस्वार्थ सेवाएं दी,जो कि काबिले तारीफ रही।
यह मेला गुरु नानक देव जी की करुणा और दुष्ट प्रवृत्ति के सुधार का संदेश देता है।
पहाडि़यों की गोद में बसा श्री जोहड़ जी साहिब धार्मिक स्थल क्षेत्र की एक ऊंची चोटी पर स्थित है।यहां का मनोरम दृश्य व वातावरण मन को मोह लेता है।
यही कारण है कि यह धार्मिक स्थल लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। हिंदू-सिख एकता के प्रतीक इस पावन स्थल तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को ट्रैफिक जाम की समस्या झेलनी पड़ी व घंटों तक वे इस जाम में फंसे रहे। बुद्धिजीवियों की माने तो ट्रैफिक कंट्रोल कर्मचारियों ने अपनी पूरी कोशिश इसे बहाल करने को लेकर समय समय पर की परंतु फिर भी इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की जरूरत है ताकि यहां आने वाले श्रद्धालु एक अच्छा अनुभव लेकर अपने अपने घरों को लौटें।प्रशासन को मेला कमेटी के साथ मेला शुरू होने से पूर्व व्यवस्थाओं को लेकर बैठक करना भी जरूरी है ताकि बिजली,पानी, स्वास्थ्य,सड़क,पार्किंग व यातायात कंट्रोल सहज बन सके।

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